मुख्यमंत्री जी दोषियों को जरूर आप नहीं बख्शोगे, मगर लोग इस पर विश्वास कैसे करें?

IBC Open Window: ये बात तो सही है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा मुख्यमंत्री जी, आप यही कहते हो, मगर कोई आप पर इसे लेकर भरोसा क्यों नहीं कर रहा!

Edited By: , June 28, 2022 / 06:43 PM IST

बरुण सखाजी

सह-कार्यकारी संपादक, आईबीसी-24

राजस्थान के उदयपुर में हुई घृणित वारदात हमे किस तरह के समाज की ओर धकेल रही है। किसी बात से कोई असहमत है तो क्या  उसका अंजाम यह होगा। आड़ होगी धर्म की। बाढ़ होगी आस्था की। यह कितना दानवी कृत्य है जब इस तरह से किया जाए और फिर उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया जाए।यह बहादुरी नहीं कायरता है। यह समझदारी नहीं मूर्खता है।

समाज में चल रही आंतरिक उठापटक की रफ्तार बढ़ रही है। इसका आशय यही निकल रहा है कि ज्यों चल रहा था वही ठीक है, नया कुछ होना नहीं चाहिए। यह सिर्फ भारत की बात नहीं जो लोगों का विश्वास आपसे उठ रहा है, बल्कि चीन से लेकर अमेरिका  तक, इजरैल से लेकर फ्रांस तक यही माहौल है। ऐसा  माहौल क्यों है, विस्तार से कुछ बता पाना ठीक नहीं। लेकिन फिलवक्त तो यही कहा जा सकता है कि आपसी विश्वास का संकट है। धर्म  की समझ का संकट है। धैर्य का संकट है। ईश्वरीय मान्यताओं का संकट है। वर्ग विशेषों में बौद्धिकता का संकट है।

इस दुर्दांत घटना पर एक मुख्यमंत्री का क्या बयान हो सकता था, यह कोई भी समझ सकता है। कोई मुख्यमंत्री यह नहीं कहेगा कि दोषियों  को संरक्षण दिया जाएगा। हर कोई यही कहेगा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन समस्या ये है कि आपकी कार्यशैली और व्यवस्था पर लोगों को विश्वास क्यों नहीं होता। क्यों  नहीं लोग यह मान लेते कि हां गेहलोत निश्चित ही इसमें दोषियों को सजा दिलाएंगे। दरअसल यह विश्वसनीयता का संकट है। यह राजस्थान में हो रही इन वारदातों के बाद वारदातों की संख्या और इन पर हो रही शिथिल कार्रवाइयों की वजह से है। कौन भूलेगा करौली हिंसा, अलवर का किस्सा, जयपुर का उन्माद और अब उदयपुर का यह खौफनाक मंजर। मगर तमाम पुरानी घटनाओं में आपने क्या अंजाम  दिया। सिवाय सियासत के आप क्या करते रहे। स्वभाविक है, कोई आप पर भरोसा नहीं कर पा रहा।

कुछ सामाजिक मसले ऐसे होते हैं जिनपर कार्रवाइयां करने से ज्यादा दिखाना पड़ती हैं। पत्थरबाजी आम न हो जाए, इसलिए घरों को बुल्डोज करके दिखाना पड़ता है। भले ही घर का एक छोटा पाटा ही क्यों न तोड़ें मगर पूरा घर ढहाया हुआ दिखाना पड़ता है। लोगों का विधान और व्यवस्था में भरोसा बना रहे, इसके लिए कुछ  ऐसा तो करके देना ही होगा जिसका संदेश गहरा हो।

दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, इत्यादि सिवाय कथन के और क्या माने जाएं, जब अलवर, करौली, जयपुर हिंसा का अब तक कोई एक्शन नजर न आया हो।

 

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