Chunavi Chaupal in Barghat : नेताओं से नाराज है बरघाट के युवा, महिलाएं भी है इस चीज से परेशान, क्या दोबारा परचम लहराएगी कांग्रेस?
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Barghat Assembly Analysis
सिवनीः Barghat Assembly Analysis छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आईबीसी 24 का चुनावी चौपाल कार्यक्रम लगातार जारी है। हम अलग-अलग विधानसभा सीटों पर जाकर वहां के विकास, विधायकों के प्रदर्शन और 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनता का मूड जानने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज बारी है मध्यप्रदेश के बरघाट विधानसभा की…
Barghat Assembly Analysis मध्यप्रदेश के सिवनी जिले की बरघाट सीट 1951 से अस्तित्व में आई, जहां 1951-1985 तक कांग्रेस का कब्ज़ा रहा। 1985 में प्रभा भार्गव ने इस सीट पर आखिरी बार कांग्रेस को जीत दिलाई थी, लेकिन 1990 के विधानसभा चुनाव में डॉक्टर ढालसिंह बिसेन ने कांग्रेस के पंडित महेश प्रसाद मिश्रा को हराकर यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी। इसके बाद 1990 से 2003 तक डॉक्टर ढालसिंह बिसेन यहां से चुनाव जीतते रहे। फिर 2008 और 2013 में कमल मर्सकोले इस विधानसभा सीट पर भाजपा से विधायक चुने गए। हालांकि 2013 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा को खासी मसक्कत करनी पड़ी और बमुश्किल 269 वोटों से भाजपा प्रत्याशी कमल मर्सकोले कांग्रेस के अर्जुन काकोड़िया से चुनाव जीत पाए।
2018 में ऐसा था परिणाम
Barghat Assembly Analysis बरघाट विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) के कमल मर्सकोले और कांग्रेस के अर्जुन काकोड़िया के बीच मुकाबला था। यहां कांग्रेस के अर्जुन जीत दर्ज करने में सफल रहे। अर्जुन ने भाजपा उम्मीदवार को 7527 वोटों से शिकस्त दी। कांग्रेस के अर्जुन काकोड़िया को 90,053 वोट मिले। वहीं भाजपा उम्मीदवार नरेश वारकाडे को 82526 वोट मिले।
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क्या कहता है यहां का जातिगत समीकरण
Barghat Assembly Analysis बरघाट को मध्य प्रदेश का धान का कटोरा कहा जाता है। प्रदेश में यहां सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले धान का उत्पादन होता है। परिसीमन के बाद आदिवासी बहुल क्षेत्र कुरई और खवासा को इस विधान सभा क्षेत्र में शामिल किया गया। अब पवारों के साथ आदिवासी मतदाता भी हर चुनाव में पार्टियों की हार और जीत तय करते हैं। यही वजह है कि यहां की सियासत भी इन्हीं दोनों समुदाय के लोगों को ध्यान में रखकर होती आई है। अनुसूचित जन जाति वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा है। यहां वही पार्टी कामयाब होती है, जो आदिवासियों को साधने में सफल होती है।
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इस बार क्या है बरघाट की जनता का मूड
अन्य विधानसभा की भांति इस विधानसभा सीट पर भी मुद्दों की कमी नहीं है। यहां की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रही है। जब हमने यहां के स्थानीय मतदाताओं से बात की तो मिलाजुला रिस्पॉस मिला। एक मतदाता ने हमसे बातचीत करते हुए विधायक के प्रदर्शन को लेकर कहा कि विधायक का काम बेहतर है। जनता के साथ सुख-दुख में खड़े रहते हैं। मंहगाई और बेरोजगारी को उन्होंने कहा कि महंगाई चरम है। रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों से हर घर के रसोई की बजट बिगड़ी हुई है।
एक युवा मतदाता ने बातचीत के दौरान कहा कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। नेता तो वादा करके चले गए लेकिन रोजगार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पा रहा है। यहां के युवा रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने को मजबूर है।

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