IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : रिक्शा चालक की बेटी माधुरी के जज्बे को सलाम, मुश्किल हालातों को मात देकर बनी 12वीं टॉपर
IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : मेरा जज्बा मुझे दिलाएगा ऊंची उड़ान: 12वीं टॉपर माधुरी सारथी
IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022: Success Story of 12th Topper Madhuri Sarthi
रायपुर। IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : अपने सामाजिक सरोकारो को निभाते हुए IBC24 समाचार चैनल हर साल स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप सम्मान से जिले की टॉपर बेटियों को सम्मानित करता है। इस साल भी IBC24 समाचार चैनल की ओर से स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप दिया जा रहा है। IBC24 की ओर से दी जाने वाली स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप केवल टॉपर बेटियों को ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक संभाग के टॉपर बेटों को भी दी जाएगी। दुर्ग जिले की माधुरी सारथी ने जिले का मान बढ़ाया है। 12वीं परीक्षा में 470 अंक हासिल किया। माधुरी सारथी ने शा. हा. से. स्कूल तकियापारा, दुर्ग में अपना पढ़ाई पूरी की है।
माधुरी सारथी ने कहा कि “मेरी मम्मी लोगों के घरों में बर्तन-पोंछा करती हैं। पापा रिक्शा चलाते हैं। घर में पढ़ने की जगह नहीं थी, स्कूल के कमरों में पढ़ती थी, तब आज यहां पहुंच पाई।“
मेरा जज्बा मुझे दिलाएगा ऊंची उड़ानः माधुरी
माधुरी की जुबानी.. मेरी मां लोगों के घरों में बर्तन-पोंछा का काम करती है। पापा रिक्शा चलाते हैं। हम लोग एक स्लम एरिया में रहते हैं। यहां पढ़ाई-लिखाई का वैसा माहौल नहीं होता। मैं जानती हूं इस हालत को बदलने के लिए मेरी पढ़ाई ही एक रास्ता हो सकती है। इसलिए संकल्प किया कि मैं इतना पढ़ूंगी कि अपने मां-बाप के लिए तो कुछ करूंगी ही, साथ ही हम जैसे और तमाम लोगों के लिए भी कुछ कर सकूं। बीते वर्ष जब लॉकडाउन लगा तो मां-बाप का काम छूट गया। घर में सब सदस्य रहते तो मुझे पढ़ने के लिए जगह नहीं मिलती। घर के एक छोटे से कमरे में पढ़ती। फिर स्कूल में क्लासरूम में जाकर बैठ जाती। स्कूल शिक्षकों ने खूब सहयोग किया। मैं ब्लैकबोर्ड के सामने बैठकर अपना अभ्यास करती थी। इस पर ऑनलाइन क्लास शुरू हुई। मोबाइल का खर्चा आ धमका। लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं मेरी खान मैडम की, जिन्होंने अपने घर में मुझे बुलाकर ट्यूशन दी और मेरा हौसला झुकने नहीं दिया। स्कूल शिक्षकों ने मेरा जज्बा बनाए रखा। वे मुझे कइयों महापुरुषों के संघर्ष के किस्स सुनाते, जिससे मुझे लगता मेरा संघर्ष तो कुछ भी नहीं। यहां से प्रेरणा जागती और मैं और खड़ी हो जाती। लॉकडाउन के बाद मेरे मम्मी-पापा ने अपनी मेहनत और बढ़ा दी, ताकि मैं सुकून से पढ़ सकूं। मैं चाहती हूं यूपीएससी करके आईएएस बनूं और मेरे जैसे तमाम वंचितों के लिए काम करूं। आईबीसी-24 की स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप मुझ जैसी बेटियों के लिए असल में कितनी बड़ी मदद है, इसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं।

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