बहनों का हाथ…सफलता का साथ,अश्रिता जैन, भोपाल
बहनों का हाथ...सफलता का साथ,अश्रिता जैन, भोपाल
किसी भी सफल व्यक्ति की विशेषता होती है कि वह किसी भी काम को करने से पहले पूरा विश्लेषण करता है। इस विश्लेषण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हम परिणामों को लेकर आश्वस्त हो सकते हैं। फिर योजना बनाकर उसके कार्यान्वयन को अंतिम रूप दें। ऐसे में मिलती है सफलता की गारंटी।
अश्रिता जैन ने 12वीं कक्षा में कॉमर्स समूह में पांच सौ में से 477 नंबर लाकर भोपाल जिला टॉप किया है। उनका मकसद च्त्।ैभ् है, जिसे पूरा करने के लिए वह पहले सीए बनना चाहती है। परिवार की आर्थिक तंगी के बावजूद अश्रिता के साथ उसकी चारों बहनें भी च्त्।ैभ् का सपना पूरा करने के लिए घर से दूर भोपाल में रहकर एजुकेशन लोन के सहारे अपना मुकाम पाने के प्रयास में जुटी हैं। सबसे बड़ी बहन हिमांशी सिविल इंजीनियर बनने के बाद अब इंजीनियरिंग की व्यवहारिक बारीकियां समझने में जुटी हैं तो हिमांशी से छोटी बहन प्रिया बीडीएस की पढ़ाई कर रही है। प्रिया से छोटी बहन श्रेया बी.टेक की पढ़ाई कर रही है जबकि चैथे नंबर की अश्रिता सीए बनना चाहती है। सबसे छोटी बहन प्रियल अभी ग्यारहवीं में है। इन पांचों बहनों का मकसद च्त्।ैभ् है। च्त्।ैभ् इस नाम में अश्रिता का पूरा परिवार समाया हुआ है। पी से बहन प्रिया और प्रियल, आर से पापा का नाम राजकुमार, ए से खुद अश्रिता और मम्मी का नाम आशा, जबकि एस से बड़ी बहन श्रेया और एच से हिमांशी। अश्रिता के साथ इन पांचों बहनों ने तय किया है कि वे भविष्य में च्त्।ैभ् नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी संचालित करेंगी और इंजीनियरिंग से लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट की जिम्मेदारी खुद ही संभालेंगी। कंपनी में अकाउंट की जिम्मेदारी निभाने के लिए ही अश्रिता ने कॉमर्स विषय लेकर सफल सीए बनने का सपना देखा है। अश्रिता बताती हैं कि उनका पूरा परिवार सीहोर जिले के आष्टा में स्थित मैना गांव में होने वाली खेती पर निर्भर है। पढ़ाई जारी रखने के लिए दो बहनों को एजुकेशन लोन लेना पड़ा। आष्टा में दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अश्रिता सीए बनने का सपना लेकर ग्यारहवीं में भोपाल आई और जी-तोड़ मेहनत कर बारहवीं में भोपाल जिले में पहला स्थान प्राप्त किया। अश्रिता को पढ़ाई के साथ सिंगिंग, डांसिंग और नॉवेल पढने का शौक है।

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