गुरबत से आगे सपनों की मंजिल , प्रियांशी कनकने , ग्वालियर
गुरबत से आगे सपनों की मंजिल , प्रियांशी कनकने , ग्वालियर
दीये और तूफान की कहानी तो सभी जानते हैं। ऐसे ही एक बेटी ने शिक्षा के जिद्दी दीये से गुरबत के तूफान को हरा दिया। वह बेटी है प्रियांशी, जिसने गुरबत के तूफान के बावजूद सपनों की एक मंजिल तय की और धीरे-धीरे उस सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही है।
जिला ग्वालियर की प्रियांशी कनकने ने 500 में 471 अंक प्राप्त कर जिले में टॉप किया है। प्रियांशी अपने परिवार के साथ जिला ग्वालियर की डबरा तहसील में रहती है। प्रियांशी का परिवार काफी गरीब है। पिता राजीव कनकने छोटा सा व्यवसाय कर परिवार का भरण पोषण करते हैं तो माँ रेखा कनकने घर पर सिलाई कर गृहस्थी में हाथ बंटाती है। प्रियांशी का भाई ग्वालियर के आईटीएम कॉलेज से बीटेक सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा है। प्रियांशी के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है फिर भी गरीबी की स्थिति से जूझते हुए अपनी पढ़ाई कर रही हैं। प्रियांशी को पढ़ने की प्रेरणा माता-पिता व मंगल सर से मिली। पढ़ाई करते समय प्रियांशी ने सोचा था कि नंबर अच्छे आएंगे, लेकिन यह नहीं सोचा था कि जिला टॉप कर लेगी। प्रियांशी ने अलग से कोई भी पढ़ने की तैयारी नहीं की केवल पढ़ाई में सेल्फ स्टडी किया और खुद के बनाए नोट्स से पढ़ाई करती थी। जब भी जरूरत पड़ती थी तो प्रियांशी यूट्यूब की मदद लेती थी। वह दिन में पांच घंटे पढ़ाई करती थी। उसे गणित पसंद है। खेल में लूडो पसंद है। कभी-कभार समय निकाल कर टीवी देखना पसंद है। आगे चलकर प्रियांशी का सपना बैंक या एसएससी में जॉब करने का है।

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