‘मेरी कामयाबी में सबका सहयोग’, योगिता परमार, सिहोर
‘मेरी कामयाबी में सबका सहयोग’, योगिता परमार, सिहोर
यह सत्य है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही प्राप्त करते हैं। नकारात्मक सोच जहां हमें नाकामी की ओर ले जाती है, वहीं सकारात्मक विचार हमें सफलता की ओर बढ़ाते हैं। योगिता की सकारात्मक सोच से ही उसे यह सफलता मिली है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की 12वीं की परीक्षा में सिहोर जिले में टॉप करने वाली योगिता परमार कलेक्टर बनना चाहती है। किसान पिता नारायण सिंह एवं मां उमा परमार की पुत्री के लिए कड़ी मेहनत और निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रथम प्रेरणास्त्रोत उनके माता-पिता और गुरूजन हैं। माता-पिता ने विकट परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी और योगिता को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया। किसान नारायण सिंह परमार का कहना है कि योगिता ने हर रोज 6 से 7 घंटे पढ़ाई की। योगिता के पिता कहते हैं कि किसान होने के बाद भी योगिता को सीहोर शहर में कठिनाईयों के साथ महंगी शिक्षा दिलाई। योगिता माता-पिता के सपनों को साकार करने आगे की पढ़ाई पर ध्यान दे रहीं है। योगिता स्मार्ट पढ़ाई के लिए मोबाइल एजुकेशन एप का भी उपयोग कर रहीं है। योगिता फेसबुक और वाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया से काफी दूर है। योगिता अपनी फिटनेस पर भी काफी ध्यान देती है। स्कूल के बाद सहेलियों के साथ खेलना-कूदना उसे पसंद है। कोर्स से हटकर अन्य ज्ञानवर्धक किताबें पढ़ना उनके शौक में शामिल है। योगिता आत्मनिर्भर बनकर अपने माता पिता को चारों धाम की धार्मिक यात्रा कराने के लिए भी संकल्पित है। योगिता ने आत्मविश्वास और लगनशीलता से इस लक्ष्य को प्राप्त किया। योगिता ने परीक्षा की तैयारी स्कूल और घर पर ही की। किसी तरह के कॉम्पीटिशन कोर्स या ट्यूशन का सहारा नहीं लिया।

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