Iran Launched Long Range Missile: भारत के करीब हिन्द-महासागर तक पहुंची ईरान-अमेरिका की की लड़ाई.. दागी गई गया 2000 किमी रेंज वाली मिसाइल
Iran Launched Long Range Missile: ईरान ने 2000 किमी रेंज मिसाइल दागी, हिंद महासागर तक तनाव बढ़ा, भारत-श्रीलंका भी सतर्क हुए
Iran Launched Long Range Missile || Image- Clash Report File
- ईरान ने लंबी दूरी की मिसाइल दागी
- डिएगो गार्सिया अमेरिकी बेस निशाने पर
- भारत-श्रीलंका क्षेत्र में बढ़ा तनाव
तेहरान: मध्य-एशिया में फैले अमेरिका-ईरान की ताजा लड़ाई ने अब अपनी सीमाओं को पार कर लिया है। (Iran Launched Long Range Missile) ईरान ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए जो कदम उठाया है, उसने श्रीलंका और भारत को भी सचेत कर दिया है।
क्या था ईरान का घातक कदम?
दरअसल ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी/ब्रिटिश अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (लगभग 4,000 किमी) दागीं है। दोनों ही लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं। संभावना जताई जा रही है कि, एक में खराबी आ गई, दूसरी को संभवतः अमेरिकी SM-3 मिसाइल ने रोक लिया। लेकिन सवाल है कि यह इतनी बड़ी घटना क्यों है?
2000 किमी रेंज वाली मिसाइल
ईरान ने सार्वजनिक रूप से अपनी मिसाइलों की सीमा लगभग 2,000 किमी बताई थी। इससे पता चलता है कि इसकी मारक क्षमता इससे दोगुनी हो सकती है। इतनी दूर से हमला करने का यह पहला मामला है। अब संघर्ष केवल मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं है। डिएगो गार्सिया बमवर्षक विमानों, पनडुब्बियों, रसद और लंबी दूरी के अभियानों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। (Iran Launched Long Range Missile) भले ही यह हमला विफल रहा हो, लेकिन इससे दूरस्थ अमेरिकी/ब्रिटिश ठिकानों को निशाना बनाने की उनकी मंशा और क्षमता का पता चलता है।
THIS IS VERY BIG.
Iran fired 2 intermediate-range ballistic missiles (~4,000 km) at the U.S./U.K. base on Diego Garcia in the Indian Ocean.
Both failed to hit (one malfunctioned, one likely intercepted by a U.S. SM-3 missile).
Why this is a big deal?
Iran publicly claimed… pic.twitter.com/jX1h0Bsywr
— Clash Report (@clashreport) March 21, 2026
जापान के सामने ईरान की शर्त
व्यापारिक दृष्टिकोण से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ में कई देशों के जहाज फंस हुए है। अलग-अलग देश ईरान से संपर्क में है और अपने जहाज़ों के सुरक्षित निकासी के लिए वार्ता कर रहे है। इनमें भारत के भी करीब 22 जहाज शामिल है। इन 22 में से 6 जहाज एलपीजी कैरियर है। भारत सरकार भी ईरानी सरकार से इस संबंध में चर्चा कर रही है। हालाँकि इससे पहले भारत के शिवालिक और नंदा समेत तीन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से हरी झंडी मिल गई थी और वे स्वदेश पहुँच चुके है।
जापान के सामने ईरान की शर्त
इस बीच ईरानी सरकार ने जापान के सामने सशर्त निकासी का विकल्प रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघ्ची ने कहा है कि, (Iran Launched Long Range Missile) अगर जापान तेहरान से समन्वय स्थापित करता है तो उनके जहाज़ों को भी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सुरक्षित तरीके से रवाना होने दे दिया जाएगा।
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi says Iran will help Japanese ships safely pass through the Strait of Hormuz if they coordinate with Tehran.
Source: Kyodo News pic.twitter.com/e1YgBXOain
— Clash Report (@clashreport) March 21, 2026
ट्रंप नहीं चाहते ईरान के साथ सीजफायर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ चल रहे युद्ध में फिलहाल युद्धविराम (सीजफायर) नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक पक्ष दूसरे पर बढ़त बना रहा हो, तब सीजफायर का कोई मतलब नहीं होता। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि “हम बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मैं सीजफायर नहीं चाहता।”
“खुद ही खुल जाएगा” स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर कहा कि यह एक समय पर “खुद ही खुल जाएगा।” (Iran Launched Long Range Missile) उन्होंने यह भी कहा कि इस रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई देशों की मदद की जरूरत है और अगर चीन और जापान जैसे देश इसमें शामिल हों तो अच्छा रहेगा।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से जहाजों के जरिए गुजरता है, जिससे खाड़ी देशों का तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है।
इस समुद्री मार्ग की सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 33 किमी है और हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से ट्रांसपोर्ट होता है। इसलिए अगर यहां तनाव या युद्ध की स्थिति बनती है तो वैश्विक तेल प्रासंगिक, उपलब्धता चेन और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। (Iran Launched Long Range Missile) इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल “चोक-पॉइंट” माना जाता है और जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो यह क्षेत्र वैश्विक चर्चा का केंद्र बन जाता है।
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