MP Assembly Elections 2023: चंबल’ की चुनौती..बेहतर किसकी रणनीति? क्या ग्वालियर-चंबल में बीजेपी को भितरघात का डर?
MP Assembly Elections 2023: चंबल' की चुनौती..बेहतर किसकी रणनीति? क्या ग्वालियर-चंबल में बीजेपी को भितरघात का डर?
भोपाल। MP Assembly Elections 2023 ग्वालियर-चंबल संभाग को एमपी की सत्ता की चाबी कहा जाता है। इसको जो साध लिया। सरकार उसकी इसलिए बीजेपी-कांग्रेस चंबल को साधने के लिए पूरा जोर लगा रही है। बात बीजेपी की करे तो ग्वालियर-चंबल अंचल में बीजेपी ने अपने सारे सितारों को जमीन पर उतार दिया है। पीएम मोदी,अमित शाह,राजनाथ सिंह, बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं। उधर कांग्रेस का दावा है कि चंबल में सिंधिया की वजह से बीजेपी में अंतरकलह है।
MP Assembly Elections 2023 ग्वालियर-चंबल संभाग यही वो इलाका है। जिसने 2018 में कांग्रेस की सरकार बनाई और फिर बाद में गिराने का काम भी किया। 2018 में ग्वालियर चंबल की 34 सीटों में से कांग्रेस ने 27 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया। बीजेपी सिर्फ 7 सीटों पर सिमट कर रह गई। उसके बाद क्या हुआ ये सबके सामने है।
ग्वालियर चंबल की 20 सीटों पर उपचुनाव हुए और बीजेपी ने हिसाब बराबर कर दिया…यानि उपचुनाव के बाद बीजेपी इस अंचल में 16 सीटों पर आई और कांग्रेस की सीटें घटकर 17 रह गईं…खैर अब फिर से मध्यप्रदेश में चुनाव हैं, बीजेपी पूरी ताकत लगा रही है, लेकिन कांग्रेस फिलहाल इस अंचल में पहले के मुकाबले मज़बूत नज़र आ रही है…वो इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने इस बीच नगरीय निकाय चुनावों में ग्वालियर और मुरैना नगर निगम जीतकर खुद को साबित कर दिया है।
दरअसल कांग्रेस को इसलिए भी फायदा मिलने की उम्मीद है कि क्योंकि ग्वालियर चंबल अंचल में सबसे ज्यादा बगावत बीजेपी में ही हुई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों के बीजेपी में आने से भितरघात की आशंका पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई हैं। बीजेपी ने इसी डैमेज को कंट्रोल करने के लिए उपचुनाव के बाद ग्वालियर चंबल अंचल के 16 विधायकों में से 8 को मंत्री पद से नवाज़ दिया। ताकि घरेलू झगड़े,गुटबाजी से पार्टी को निजात मिलेगी, लेकिन हुआ उल्टा 8-8 मंत्रियों वाले ग्वालियर चंबल अंचल में बीजेपी में गुटबाजी जमकर हुई है। खैर बीजेपी की लीडरशिप ये जानती है इसलिए अब तक पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम दिग्गजों ने सारी ताकत झोंक दी।
जाहिर है मध्यप्रदेश का सियासी दंगल दिलचस्प होता जा रहा है। बीजेपी की गुटबाजी का माइलेज कांग्रेस लेने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि ग्वालियर चंबल में पार्टी 2018 की स्क्रिप्ट दोहराने में कामयाब होगी। फिलहाल ग्वालियर चंबल के नतीजों के लिए आपको और हमको 3 दिसंबर तक का इंतज़ार करना होगा।

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