50 thousand fine will be imposed if you take a sim with fake documents

फर्जी कागजात से सिम लिए तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना ! नए नियम में शामिल हैं ये बातें

50 thousand fine will be imposed if you take a sim with fake documents फर्जी कागजात से सिम लिए तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना

Edited By: , November 29, 2022 / 08:34 PM IST

नई दिल्ली:  आज आप को कहीं भी किसी भी सिम को खरीदने के लिए आधारकार्ड की जरुरत होती है। जिसमें बहोत सारी जानकारी लिखी होती है। साथ ही साथ उसमें आपके घर का पता आपके पेरेंट्स के बारे में जानकारी होती है। जिसकी मदद से सरकार आप पर नजर रखती है। लेकिन यदि यही जानकारी किसी और के हांथ लग जाए तो वो हानिकारक हो सकता है। इसिलिए भारत सरकार ने निश्चित रुप से नियम कानून लागू किया है कि यदि आपने मोबाइल सिम को ईसू करते समय फर्जी दस्तावेज देते हैं , तो आपके खिलाप कार्रवाई की जाएगी। साथ ही साथ आपके उपर जुर्माना भी लगाया जाएगा। जानकारी के लिए बता दूं कि आप किसी भी प्लैटफॉर्म पर पकड़े गए तो कम से कम 50 हजार रुपये का जुर्माना और जेल को तय समझिए।

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मीडिया रिपोर्ट की माने तो हाल ही जारी किए गए टेलिकम्यूनिकेशन बिल के ड्राफ्ट में आपको ये सारी सुविधाएं देखने को मिलने वाली हैं। जिसमें आपके नेटवर्क के साथ आपको ओटीटी प्लैटफॉर्म के सारे नियम कानून देखने को मिल जाएंगे। इस बार आपको कई सारी बातों के लिए चिंता करने की आवश्यकता नहीं हैं। आपके सेफ्टी के लिए भारत सरकार बड़ा कदम उठाने जारी हैं। ऑनलाइन फ्रॉड और गैर कानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें साइबर अपराधियों ने फर्जी कागजात पर सिम कार्ड लिए और उससे घटनाओं को अंजाम दिया. ऐसे लोग ओटीटी ऐप पर भी अपनी असली पहचान छुपाते हैं ताकि अपराध करने के बाद कार्रवाई से बच जाएं।

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नए नियम के मुताबिक, सभी टेलीकॉम यूजर को यह पता होना चाहिए कि उसे कौन कॉल कर रहा है। यानी किसी का फोन आता है, तो उसकी पूरी जानकारी आपको होनी चाहिए। इससे साइबर फ्रॉड से बचने में मदद मिलेगी। बिल में कहा गया है कि कोई व्यक्ति टेलीकॉम सर्विस लेता है और उसमें अपनी पहचान गलत बताता है या गलत कागजात देता है, तो इसमें 1 साल की जेल हो सकती है या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। उस व्यक्ति की सर्विस भी खत्म की जा सकती है। इस अपराध को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यानी ऐसे दोषी व्यक्ति को पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, उसे कोर्ट की अनुमति भी लेने की जरूरत नहीं होगी।

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