देश में उर्वरक का पर्याप्त भंडार, किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं: नड्डा
देश में उर्वरक का पर्याप्त भंडार, किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं: नड्डा
नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि भारत में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।
नड्डा ने उर्वरक कंपनियों और हरित अमोनिया बनाने वालों के बीच हरित अमोनिया की आपूर्ति से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर कहा, ‘‘ यह ही नहीं, भारत ने कई संकट देखे हैं। हम उर्वरक आपूर्ति के मामले में पूरी तरह सक्षम हैं। डरने की कोई जरूरत नहीं है।’’
इस समझौते को ‘‘ ऐतिहासिक और आगे की दिशा में कदम’’ करार देते हुए मंत्री ने हिंदी कहावत ‘‘ आपदा में अवसर ढूंढना है’’ का उल्लेख किया और कहा कि हरित अमोनिया के साथ यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार उर्वरक क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही है।
भारत ने 2024-25 में 306.67 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया और घरेलू मांग पूरी करने के लिए 56.47 लाख टन यूरिया का आयात किया।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में देश ने 98 लाख टन यूरिया का आयात किया है।
सरकार ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण यूरिया का घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ है और उर्वरक विभाग इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा रहा है।
बयान में कहा गया, ‘‘ आगामी खरीफ 2026 मौसम के लिए कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख टन आंकी गई है, जबकि खरीफ 2025 के दौरान वास्तविक बिक्री 361 लाख टन रही।’’
सरकार ने कहा कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वर्तमान में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है..‘‘ इस समय देश में सभी प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आगामी ढाई महीनों में किसी उर्वरक की बड़ी आवश्यकता नहीं है।’’
खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यहां से 20-30 प्रतिशत यूरिया और 30 प्रतिशत डीएपी का आयात होता है। साथ ही भारत के लगभग 50 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात भी इसी क्षेत्र से होते हैं, जो यूरिया उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
इसके अलावा घरेलू उत्पादन में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे पदार्थ और मध्यवर्ती उत्पाद जैसे अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक अम्ल, जो फॉस्फेट एवं पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों के उत्पादन में काम आते हैं… वे भी प्रभावित हुए हैं।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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