पश्चिम एशिया संकट के बीच एलपीजी, पीएनजी की कमी से जूझ रहा है एल्युमिनियम एक्सट्रूजन उद्योग
पश्चिम एशिया संकट के बीच एलपीजी, पीएनजी की कमी से जूझ रहा है एल्युमिनियम एक्सट्रूजन उद्योग
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) उद्योग संगठन एल्युमिनियम एक्सट्रूजन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलईएमए) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण एलपीजी तथा पीएनजी की आपूर्ति के गंभीर संकट से प्रभावित एल्युमिनियम एक्सट्रूजन उद्योग के लिए सरकार से राहत उपायों की मांग की है। एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न एक निर्माण प्रक्रिया है, जिसमें गर्म एल्युमिनियम मिश्र धातु को एक विशिष्ट आकार की डाई के माध्यम से दबाकर ट्यूब, छड़, फ्रेम आदि बनाए जाते हैं।
एएलईएमए ने सरकार से ब्याज दरों में कटौती और ऋण भुगतान की अवधि में छूट (मोराटोरियम) जैसे त्वरित राहत उपाय लागू करने का आग्रह किया है।
संघ ने सरकार को लिखे हालिया पत्र में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और घरों में आपूर्ति की जाने वाली पाइप वाली प्राकृतिक (पीएनजी) की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हुई है। ये दोनों ईंधन एल्युमिनियम एक्सट्रूजन विनिर्माण में गलाने, गर्म करने और ‘एजिंग’ प्रक्रियाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
संघ के अनुसार, इसकी कमी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आपूर्ति में प्राथमिकता तय किए जाने के कारण कई एक्सट्रूजन इकाइयों को बंद करना पड़ा है या उत्पादन 30 से 70 प्रतिशत तक घटाना पड़ा है।
एएलईएमए देश की लगभग 450 एल्युमिनियम एक्सट्रूजन कंपनियों में से करीब 250 का प्रतिनिधित्व करता है जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) हैं।
संघ का कहना है कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो पूंजी-गहन यह क्षेत्र कार्यशील पूंजी कमी और कर्ज भुगतान में चूक की स्थिति में पहुंच सकता है।
एएलईएमए ने कोविड-19 वैश्विक महामारी काल जैसे राहत उपायों की मांग की है, जिनमें ब्याज दरों में कमी, ऋण के भुगतान की अवधि में छूट, ब्याज भुगतान को टालना, सरकार समर्थित कम लागत वाले कार्यशील पूंजी ऋण और इस अवधि के दौरान चूक के मामलों में सिबिल मानकों में ढील शामिल हैं।
संघ ने कहा कि ये ‘‘ हमारे नियंत्रण से बाहर असाधारण परिस्थितियां’’ हैं, जो उद्योग की व्यवहार्यता के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए संचालन और रोजगार बनाए रखने के लिए सरकार से त्वरित सहायता की जरूरत है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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