अमेरिकी सेब पर शुल्क रियायत के खिलाफ सेब उत्पादक दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन: तारिगामी

अमेरिकी सेब पर शुल्क रियायत के खिलाफ सेब उत्पादक दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन: तारिगामी

अमेरिकी सेब पर शुल्क रियायत के खिलाफ सेब उत्पादक दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन: तारिगामी
Modified Date: February 27, 2026 / 01:35 pm IST
Published Date: February 27, 2026 1:35 pm IST

श्रीनगर, 27 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सेब उत्पादक अमेरिकी सेब पर प्रस्तावित शुल्क रियायत के खिलाफ अगले महीने दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे।

भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को सेब पर कोटा-आधारित शुल्क रियायत दी है। अमेरिका से आने वाले सेब भारतीय बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश करेंगे।

उत्पादकों को आशंका है कि अमेरिका से सेबों की बाढ़ भारतीय बाजार में आ जाएगी और इससे घरेलू किसानों को बड़ा झटका लगेगा।

कुलगाम के विधायक एवं श्रमिक संघ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ हमने कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को शामिल करते हुए ‘एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एएफएफआई) का गठन किया है। हमने मार्च में (व्यापार समझौते के खिलाफ) दिल्ली में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।’’

तारिगामी ने कहा कि एएफएफआई ने संयुक्त किसान मोर्चा से देश के सेब किसानों के समर्थन में एकजुटता दिखाने की अपील की है, जो अपनी आजीविका पर हमले का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ संयुक्त किसान मोर्चा ने आश्वासन दिया है कि वह इस प्रदर्शन का समर्थन करेगा। उन्होंने वादा किया है कि उनका नेतृत्व भी प्रदर्शनों में शामिल होगा।’’

संयुक्त किसान मोर्चा ने एक वर्ष से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर किया था।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तारिगामी ने कहा कि यह ‘‘व्यवहारिक रूप से अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आप जानते हैं कि इस व्यापार समझौते में अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंधित किया है। यदि हमारे देश को कुछ खरीदना है तो हमें अमेरिका की इच्छाओं पर विचार करना होगा। ऐसे में हम व्यापार संबंधी अपने निर्णयों में संप्रभु नहीं रहेंगे।’’

कुलगाम के विधायक ने कहा कि सेब उद्योग, कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

उन्होंने कहा, ‘‘ जम्मू में छोटी औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन यहां अधिक नहीं हैं। हमारे पास हस्तशिल्प था लेकिन वह भी गिरावट के दौर में है। हमारी अंतिम उम्मीद सेब है लेकिन अब हम अमेरिकी सेब से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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