नुकसानदेह खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों पर सुबह से देर रात तक रोक लगाई जाएः आर्थिक समीक्षा
नुकसानदेह खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों पर सुबह से देर रात तक रोक लगाई जाएः आर्थिक समीक्षा
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) अधिक वसा एवं चीनी वाले अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (यूपीएफ) की बढ़ती खपत पर गंभीर चिंता जताते हुए आर्थिक समीक्षा ने सुबह से देर रात तक इन उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने का सुझाव दिया है।
इसके साथ ही बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 कहती है कि शिशु और छोटे बच्चों के इस्तेमाल वाले दूध एवं पेय पदार्थों के विपणन पर भी सख्त पाबंदियों की जरूरत है।
आर्थिक समीक्षा में उच्च वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों के लिए चेतावनी के साथ पैकेट के सामने वाले हिस्से पर पोषण संबंधी सूचना देने और बच्चों को लक्षित विपणन पर लगाम लगाने का सुझाव दिया गया है।
इसमें यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि व्यापार समझौते किसी भी तरह से सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को कमजोर न करें।
समीक्षा के मुताबिक, भारत अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की बिक्री के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। नुकसानदेह खाद्य उत्पाद (जंक फूड) के रूप में चिह्नित बर्गर, नूडल्स, पिज्जा एवं शीतल पेय का बढ़ता सेवन दुनियाभर में दीर्घकालिक बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है और स्वास्थ्य असमानता भी बढ़ा रहा है।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि 2009 से 2023 के बीच यूपीएफ बाजार में 150 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई। भारत में यूपीएफ की खुदरा बिक्री 2006 के 90 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2019 में लगभग 38 अरब डॉलर हो गई जो करीब 40 गुना अधिक है। इस दौरान पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापा लगभग दोगुना हो गया।
हालांकि, केवल उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव से ही आहार में सुधार संभव नहीं है। इसके लिए खाद्य प्रणाली से जुड़े समन्वित नीतिगत कदम उठाने होंगे, जिनमें यूपीएफ उत्पादन का नियमन, स्वस्थ एवं टिकाऊ आहार को प्रोत्साहन और इनके विपणन पर नियंत्रण शामिल है।
इसके लिए सभी मीडिया माध्यमों में सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने और शिशु एवं छोटे बच्चों के दूध एवं पेय पदार्थों के विपणन पर रोक के विकल्प तलाशने के भी सुझाव दिए गए हैं।
इसमें चिली का उदाहरण दिया गया है जहां एकीकृत कानून लागू हैं, जबकि नॉर्वे और ब्रिटेन जैसे देशों में भी विज्ञापन प्रतिबंध मौजूद हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है, ‘‘हाल में ब्रिटेन ने भी बच्चों पर असर को कम करने के लिए टीवी और ऑनलाइन माध्यमों पर रात नौ बजे से पहले जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगा दी है।’’
इसमें पारंपरिक माध्यमों के साथ डिजिटल मीडिया में भी इन उत्पादों के विपणन प्रतिबंधों को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है।
समीक्षा के मुताबिक, विज्ञापन संहिता का नियम-7 भ्रामक या अस्वास्थ्यकर विज्ञापनों पर रोक लगाता है, लेकिन ‘भ्रामक’ की स्पष्ट, पोषक-तत्व आधारित परिभाषा का अभाव है।
इसी तरह, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के 2022 के दिशानिर्देश स्वास्थ्य लाभ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और बच्चों के शोषण पर रोक लगाते हैं, लेकिन स्पष्ट पोषक सीमा तय नहीं करते हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि इस नियामकीय अस्पष्टता की वजह से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के कारोबार से जुड़ी कंपनियां ‘स्वास्थ्य’, ‘ऊर्जा’ या ‘पोषण’ जैसे अस्पष्ट दावे जारी रख पा रही हैं, जो एक महत्वपूर्ण नीतिगत खामी है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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