बिहार का साख-जमा अनुपात पहली बार 60 प्रतिशत के पार, जमा राशि 6.5 लाख करोड़ रुपये पर
बिहार का साख-जमा अनुपात पहली बार 60 प्रतिशत के पार, जमा राशि 6.5 लाख करोड़ रुपये पर
पटना, 23 जून (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बैंकिंग क्षेत्र की प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन उपलब्ध जमा राशि का अधिकाधिक उपयोग स्थानीय निवेश, उद्यमिता और रोजगार सृजन के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने बड़े बैंकों से ऋण वितरण बढ़ाने तथा साख-जमा अनुपात (सीडी रेशो) में और सुधार लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यादव राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 96वीं एवं 97वीं संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन बैंकों का सीडी औसत 50 प्रतिशत से कम तथा वार्षिक साख योजना (एसीपी) की उपलब्धि 60 प्रतिशत से कम होगी, उनकी प्रत्येक छह माह पर समीक्षा की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सुधार नहीं होने पर ऐसे बैंकों में सरकारी राशि जमा नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने कृषि प्रधान बिहार में किसानों को अधिक ऋण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बैंकिंग संसाधनों को राज्य के विकास से सीधे जोड़ना समय की मांग है।
इससे पहले उन्होंने ‘बिहार किसान ऋण पोर्टल’ का शुभारंभ किया। एसएलबीसी द्वारा विकसित यह पोर्टल किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रणाली को बैंकों, जनसमर्थ पोर्टल तथा भविष्य में एग्री-स्टैक से जोड़ते हुए कृषि ऋण वितरण को अधिक पारदर्शी, त्वरित और तकनीक-सक्षम बनाएगा।
बैठक में बताया गया कि बिहार ने वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार 60 प्रतिशत से अधिक का साख-जमा अनुपात हासिल कर महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राज्य में कुल बैंक जमा राशि लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) घटकर 6.91 प्रतिशत रह गई हैं।
वार्षिक साख योजना के तहत राज्य ने 87 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए लगभग 84 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया, जबकि कृषि क्षेत्र में करीब 67 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई।
पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड तथा अन्य ऋण सुविधाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि छोटे पशुपालकों और मत्स्य किसानों को बार-बार बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने की स्थिति समाप्त होनी चाहिए तथा छोटे ऋणों के वितरण में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए।
ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ऋण स्वीकृति की धीमी गति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में लगभग 11.88 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने बैंक सखी और जीविका दीदियों की भूमिका को और मजबूत करने तथा ग्रामीण बैंक शाखाओं में बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई, ताकि महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को और गति मिल सके।
नगर विकास एवं आवास तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नीतीश मिश्रा ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में 3.37 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आवेदन अभी लंबित हैं। उन्होंने आवेदन और स्वीकृति के बीच के अंतर को कम करने, अस्वीकृत मामलों की समीक्षा करने तथा बैंक शाखाओं के स्तर पर जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कृषि वित्तपोषण में डिजिटल मंच के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, जनसमर्थ पोर्टल, एग्री-स्टैक और अन्य कृषि सेवाओं को एकीकृत कर किसानों के लिए सहज एवं समग्र ऋण व्यवस्था विकसित की जाएगी।
भाषा कैलाश
जितेंद्र अजय
अजय

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