बीआईएस ने व्हीलचेयर, बैसाखी जैसे उत्पादों के लिए नए सुरक्षा मानक तय किए
बीआईएस ने व्हीलचेयर, बैसाखी जैसे उत्पादों के लिए नए सुरक्षा मानक तय किए
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने ‘एल्बो क्रच’ (बैसाखी) से लेकर ‘पोर्टेबल व्हीलचेयर रैंप’ जैसे सहायक उत्पादों के लिए छह नए मानक जारी किए हैं। इसका मकसद देश में दिव्यांगों की सहायता के लिए उत्पाद बनाने वाले उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, ये मानक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की आवश्यक सहायक उत्पादों की राष्ट्रीय सूची पहल के तहत तैयार किए गए हैं। इनमें आवाजाही के लिए मददगार उपकरण, टेक्टाइल नक्शों और ब्रेल साइनेज के लिए सुलभ डिजाइन एवं व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए पोर्टेबल रैंप शामिल हैं।
‘एल्बो क्रच’ (कोहनी वाली बैसाखियों) के लिए जारी मानक आईएस 18558 (भाग 1): 2025, अंतरराष्ट्रीय आईएसओ 11334-1 मानक के अनुरूप है। इसमें पूरी तरह सुसज्जित बैसाखियों के लिए आवश्यकताएं और परीक्षण विधियां निर्धारित की गई हैं जिनमें हैंडग्रिप और टिप शामिल हैं।
इन मानकों में सुरक्षा, एर्गोनॉमिक्स, प्रदर्शन और मार्किंग एवं लेबलिंग जैसे विनिर्माताओं द्वारा दी जाने वाली अनिवार्य जानकारी को शामिल किया गया है।
वॉकिंग स्टिक (छड़ी) के लिए दो अलग-अलग मानक बनाए गए हैं। आईएस 5145: 2026…यह भारतीय मानक है जिसमें लकड़ी, बांस, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर से बनी छड़ियों के लिए सामग्री, आकार, आयाम, फिनिश और प्रदर्शन से जुड़े मानदंड तय किए गए हैं।
आईएस 18558 (भाग 4): 2025 मानक आईएसओ 11334-4 के अनुरूप है और तीन या अधिक पैरों वाली छड़ियों के लिए हैंडल, टिप, सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों को निर्धारित करता है।
सुलभ डिजाइन से जुड़े आईएस 19189: 2025, आईएसओ 19028 के तहत टैक्टाइल (स्पर्शनीय) गाइड मैप के डिजाइन, जानकारी एवं प्रदर्शन के मानक तय करता है। इसका उद्देश्य दृष्टिबाधित या कम दृष्टि वाले लोगों को सार्वजनिक स्थानों, परिवहन क्षेत्रों और पार्क में सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से आवाजाही में मदद करना है।
एक अन्य मानक आईएस 19190: 2025 (आईएसओ 17049 के अनुरूप) ब्रेल साइनेज के उपयोग से संबंधित है। इसमें ब्रेल अक्षरों के आयाम, सामग्री की विशेषताएं और सार्वजनिक व व्यावसायिक स्थानों पर इसके व्यावहारिक उपयोग के दिशा-निर्देश शामिल हैं।
पोर्टेबल रैंप और उद्योग परिप्रेक्ष्य से जुड़े आईएस 19631: 2026 एक स्वदेशी मानक है जिसमें व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं, स्ट्रोलर या कार्ट धकेलने वालों, बुजुर्गों तथा बच्चों के लिए पोर्टेबल रैंप शामिल हैं। यह घर, कार्यस्थल और सामुदायिक स्थानों में उपयोग के लिए लागू होगा।
ये मानक बीआईएस की तकनीकी समिति द्वारा तैयार किए गए हैं जिसमें उद्योग, शिक्षाविदों और सरकारी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
तकनीकी समिति में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर) जैसे सामाजिक संगठनों का भी प्रतिनिधित्व है।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल केंद्र सरकार के ‘सुगम्य भारत अभियान’ को मजबूत करेगा जिसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना है। बढ़ती वृद्ध आबादी के कारण भारत में सहायक प्रौद्योगिकी की मांग तेजी से बढ़ रही है।
बीआईएस के अनुसार, नए मानकों का पालन करने से घरेलू विनिर्माता अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को हासिल कर सकेंगे, निर्यात के अवसर बढ़ेंगे और न्यूनतम सुरक्षा व प्रदर्शन मानकों के साथ नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
भाषा निहारिका रमण प्रेम
प्रेम

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