ब्रिक्स बैठक: चौहान ने छोटे किसानों की बेहतरी एवं खाद्य सुरक्षा के लिए साझा प्रयास का किया आह्वान

ब्रिक्स बैठक: चौहान ने छोटे किसानों की बेहतरी एवं खाद्य सुरक्षा के लिए साझा प्रयास का किया आह्वान

ब्रिक्स बैठक: चौहान ने छोटे किसानों की बेहतरी एवं खाद्य सुरक्षा के लिए साझा प्रयास का किया आह्वान
Modified Date: June 12, 2026 / 02:35 pm IST
Published Date: June 12, 2026 2:35 pm IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 12 जून (भाषा) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों से छोटे व सीमांत किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से संभव है।

चौहान ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने ‘छोटे किसान, महिलाएं और युवा : भोजन का भविष्य सुरक्षित करना’ विषय पर मंत्रिस्तरीय संवाद की अगुवाई भी की।

चौहान ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स बैठक में कहा, ‘‘ यदि छोटे किसान मजबूत होते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ हो जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत का दृष्टिकोण ‘‘युद्ध नहीं शांति, संघर्ष नहीं समन्वय’’ की परिकल्पना पर आधारित है।

चौहान ने कहा कि वैश्विक कृषि साझेदारी को भी इस भावना के साथ आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स बैठक छोटे एवं सीमांत किसानों के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच नीतिगत सहयोग और साझेदारी वैश्विक कृषि को नयी दिशा दे सकती है।

मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स बैठक में जारी संवाद विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और बाजार की अनिश्चितता का सामूहिक समाधान खोजने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

चौहान ने कहा, ‘‘ हम सभी छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए सामूहिक प्रयास करें।’’

उन्होंने विश्वास जताया कि ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के बीच संवाद अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करेगा।

चौहान ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है तथा खाद्यान्न, बागवानी और मत्स्य उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता है। कृषि क्षेत्र देश के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल की आजीविका का आधार है।

चौहान ने कहा कि भारत में लगभग 87 प्रतिशत कृषक छोटे व सीमांत किसान हैं और उन्हें सशक्त बनाना समावेशी विकास की कुंजी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे किसानों को आर्थिक सुरक्षा और सहायता मिल रही है।

चौहान ने साथ ही कहा कि करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों का नेतृत्व कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलें देश में प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तनों की मिसाल हैं।

चौहान ने प्राकृतिक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि कृषि में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के जरिये युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस क्षेत्र को अधिक आधुनिक बना रही है।

बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी मौजूद रहे।

मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले, इंदौर में ब्रिक्स के कृषि कार्य समूह के तहत अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक बृहस्पतिवार को संपन्न हुई थी।

अधिकारियों ने बताया कि पांच दिवसीय विचार-विमर्श में बनी सहमति के आधार पर शनिवार को ब्रिक्स का ‘इंदौर घोषणापत्र’ जारी किए जाने की उम्मीद है।

ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।

भाषा हर्ष मनीषा निहारिका

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