‘बजट में 1.52 लाख करोड़ रुपये के सीमा-शुल्क विवादों के लिए उपायों की घोषणा की उम्मीद’
‘बजट में 1.52 लाख करोड़ रुपये के सीमा-शुल्क विवादों के लिए उपायों की घोषणा की उम्मीद’
नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार 1.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीमा-शुल्क के मामले लंबित होने को ध्यान में रखते हुए आगामी बजट में कर सुधार और कारोबारी सुगमता के लिए सीमा-शुल्क पर माफी योजना और दरों का सरलीकरण जैसे उपायों की घोषणा कर सकती है। प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।
प्राइस वाटरहाउस के प्रमुख गौतम खट्टर ने पीटीआई-भाषा से कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करते समय सीमा-शुल्क के स्लैब को आठ से घटाकर पांच या छह करने पर विचार कर सकती है। इसका उद्देश्य मुक्त व्यापर समझौतों (एफटीए) के कारण पैदा हुई उलट शुल्क संरचना को दूर करना है।
उन्होंने कहा, ‘कई देशों के साथ एफटीए होने के कारण तैयार उत्पादों पर कम शुल्क लगता है , जबकि उनके उत्पादन में प्रयुक्त कच्चे माल पर उच्च शुल्क लगता है। कच्चे माल पर शुल्क को घटाकर इस असंतुलन को ठीक करने का यह सही समय है।’
मोदी सरकार ने न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ओमान समेत कई देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं और यूरोपीय संघ एवं अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों को लेकर बातचीत जारी है।
वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सीमा-शुल्क संरचना को पहले ही आठ स्लैब में सीमित किया जा चुका है।
खट्टर ने कहा कि सीमा-शुल्क विवादों के निपटान के लिए माफी योजना लाने से पुराने लंबित विवादों के खत्म होने की उम्मीद है। मार्च 2024 तक सीमा-शुल्क के कुल 38,014 मामले लंबित थे।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, बजट 2026-27 से सीमा-शुल्क से त्वरित क्लियरेंस जैसी व्यापार सुगमता उपायों की भी उम्मीद है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण

Facebook


