मंत्रिमंडल ने शहरी अवसंरचना के लिए एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ को दी मंजूरी

मंत्रिमंडल ने शहरी अवसंरचना के लिए एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ को दी मंजूरी

मंत्रिमंडल ने शहरी अवसंरचना के लिए एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ को दी मंजूरी
Modified Date: February 14, 2026 / 05:43 pm IST
Published Date: February 14, 2026 5:43 pm IST

नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहरी अवसंरचना को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए शनिवार को एक लाख करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता के साथ ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (यूसीएफ) शुरू करने को मंजूरी दे दी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि इस योजना के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी, बशर्ते कि परियोजना के लिए कम से कम 50 प्रतिशत धन बाजार से जुटाया गया हो।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पहल से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है।

बयान के मुताबिक, यह कदम भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है, जिसके तहत अब अनुदान-आधारित वित्तपोषण के बजाय बाजार से जुड़े, सुधार-आधारित और परिणाम-उन्मुख बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जाएगा।

शहरी अवसंरचना के विकास पर केंद्रित यह कोष उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा।

बयान के अनुसार, इस कोष का लक्ष्य शहरों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति सुदृढ़, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल बनाना है, ताकि उन्हें देश की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित किया जा सके।

यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक प्रभावी रहेगा, जिसे वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है।

यह योजना बजट 2025-26 के उस दृष्टिकोण को लागू करती है जिसमें शहरों को ‘वृद्धि के केंद्र’ के रूप में विकसित करने और शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास का प्रस्ताव दिया गया था।

सरकार के अनुसार, परियोजना के वित्तपोषण का कम-से-कम 50 प्रतिशत हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) जैसे बाजार स्रोतों से जुटाना अनिवार्य होगा। शेष हिस्सा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों या शहरी स्थानीय निकायों द्वारा वहन किया जा सकता है। परियोजनाओं का चयन एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ‘चैलेंज मोड’ के माध्यम से किया जाएगा।

यह कोष 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, सभी राज्यों की राजधानियों और एक लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख औद्योगिक शहरों को कवर करेगा।

साथ ही, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के सभी शहरी स्थानीय निकायों और एक लाख से कम आबादी वाले छोटे निकायों को ‘ऋण पुनर्भुगतान गारंटी योजना’ के तहत सहायता दी जाएगी।

बयान के मुताबिक, परियोजनाओं का मूल्यांकन उनके आर्थिक, सामाजिक और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रभाव, रोजगार सृजन, सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मानकों पर किया जाएगा।

पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और छोटे निकायों को बाजार से कर्ज लेने में मदद करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की ‘ऋण पुनर्भुगतान गारंटी योजना’ को भी मंजूरी दी गई है।

इसके तहत पहले ऋण के लिए सात करोड़ रुपये या ऋण राशि का 70 प्रतिशत (जो भी कम हो) की केंद्रीय गारंटी दी जाएगी।

पहले ऋण का सफलतापूर्वक पुनर्भुगतान करने पर, अगले कर्ज के लिए सात करोड़ रुपये या ऋण राशि का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, उसकी केंद्रीय गारंटी प्रदान की जाएगी।

भाषा सुमित प्रेम

प्रेम


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