खेती के तरीकों पर शोध के लिए डच कंपनियों, पंजाब कृषि विश्विद्यालय के बीच सहयोग की अपील

खेती के तरीकों पर शोध के लिए डच कंपनियों, पंजाब कृषि विश्विद्यालय के बीच सहयोग की अपील

खेती के तरीकों पर शोध के लिए डच कंपनियों, पंजाब कृषि विश्विद्यालय के बीच सहयोग की अपील
Modified Date: April 22, 2026 / 10:28 pm IST
Published Date: April 22, 2026 10:28 pm IST

चंडीगढ़, 22 अप्रैल (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को नीदरलैंड की बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के बीच शोध और टिकाऊ खेती के तरीकों के लिए सहयोग में तेजी लाने की अपील की।

एक सरकारी बयान के अनुसार, , अपनी सरकार के निवेश प्रोत्साहन अभियान के तहत नीदरलैंड की यात्रा पर गये मान ने पंजाब के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि और उद्योग में बेहतरीन तरीकों का जायजा लिया। इन किसानों ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘देश की खातिर, पंजाब के किसानों ने राज्य की उपजाऊ जमीन और जल संसाधनों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया है, जिससे अब गेहूं-धान के चक्र से हटना जरूरी हो गया है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस मकसद के लिए, राज्य में फसल विविधीकरण (अलग-अलग तरह की फसलें उगाने) को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है।’’ साथ ही उन्होंने कहा कि नीदरलैंड इस काम में राज्य की काफी मदद कर सकता है।

रॉटरडैम में एलटी फूड्स के संयंत्र के दौरे के दौरान, कंपनी ने 80 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी और एक लाख से ज्यादा किसानों के साथ अपने मजबूत जुड़ाव के बारे में जानकारी दी।

इस यात्रा का मुख्य मकसद टिकाऊ खेती के तरीके अपनाना और पंजाब के बासमती चावल की पहचान को दुनिया भर में फैलाना है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चलने के महत्व का जिक्र करते हुए मान ने कहा, ‘‘टिकाऊ खेती की जरूरत है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती चावल को बढ़ावा देने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करना शामिल है।’’

इस बातचीत के बाद, एलटी फूड्स ने पंजाब में बासमती चावल के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के साथ-साथ पक्की खरीद और कम कीटनाशक वाली खेती के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने पर सहमति जताई।

खेती में आने वाली आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुनाफे का मार्जिन कम होने की वजह से, खेती अब कोई फायदे का सौदा नहीं रह गई है। इसके चलते किसानों को अपनी रोजी-रोटी चलाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।’’

मान ने आल्समीर में ‘फ्लोरीकल्चर ऑक्शन मार्केट’ भी गये। यह दुनिया का सबसे बड़ा फूलों और पौधों का बाजार है, जहां उन्होंने डच (नीदरलैंड) नीलामी प्रणाली और उत्पादन, लॉजिस्टिक और वैश्विक वितरण के इसके बेहद व्यवस्थित प्रणाली को देखा।

उन्होंने कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए पंजाब में ऐसे ही मॉडल अपनाने की इच्छा जतायी।

नीदरलैंड सरकार के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्रकृति मंत्रालय के साथ एक विस्तृत बैठक में मान ने कृषि क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड की मजबूत साझेदारी का उल्लेख किया।

वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित करते हुए मान ने कहा, ‘‘पंजाब निवेश के लिए एक अनुकूल परिवेश प्रदान करता है।’’

उन्होंने नीदरलैंड की कंपनियों को आगामी कृषि-तकनीक और औद्योगिक मंचों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

भाषा राजंश राजेश रमण

रमण


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