केंद्र ने महाराष्ट्र के लिए अरहर, चने की खरीद की समयसीमा बढ़ाई

केंद्र ने महाराष्ट्र के लिए अरहर, चने की खरीद की समयसीमा बढ़ाई

केंद्र ने महाराष्ट्र के लिए अरहर, चने की खरीद की समयसीमा बढ़ाई
Modified Date: May 6, 2026 / 09:15 pm IST
Published Date: May 6, 2026 9:15 pm IST

मुंबई, छह मई (भाषा) राज्य के विपणन मंत्री जय कुमार रावल ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में 2025-26 के खरीफ सत्र के लिए अरहर और चने की खरीद की समयसीमा बढ़ा दी है। साथ ही चने की खरीद का लक्ष्य भी बढ़ा दिया है।

राज्य सरकार के अनुरोध के बाद, अरहर (तुअर) की खरीद की समयसीमा 31 मई तक और चने की खरीद की समयसीमा 29 मई तक बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने चने की खरीद का लक्ष्य भी 58,632 टन बढ़ाकर कुल 8,19,882 टन कर दिया है।

रावल ने बताया कि यह फैसला केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य की मांग पर विचार करने के बाद लिया। यहां

जारी एक सरकारी बयान में कहा गया है कि रावल ने इस कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चौहान का आभार व्यक्त किया।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत, अरहर की खरीद की शुरुआती अवधि 90 दिन और चने की खरीद की अवधि 60 दिन थी। हालांकि, किसान लगातार इस अवधि को बढ़ाने की मांग कर रहे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार के साथ इस मामले को उठाया।

राज्य में अरहर की खरीद एक फरवरी, 2026 को शुरू हुई थी। इसकी समयसीमा पहले एक मई तय की गई थी, इसे अब बढ़ाकर 31 मई कर दी गई है। केंद्र सरकार ने अरहर की खरीद का लक्ष्य 3.37 लाख टन तय किया है, जिसमें से अब तक 37,801 किसानों से 6,82,037 क्विंटल अरहर की खरीद की जा चुकी है।

चने की खरीद एक मार्च, 2026 को शुरू हुई थी और पहले इसे 29 अप्रैल को समाप्त होना था, लेकिन अब यह 29 मई तक जारी रहेगी। चने की खरीद का शुरुआती लक्ष्य 7,61,250 टन था, जिसे 58,632 टन बढ़ाकर 8,19,882 टन कर दिया गया है। बयान में रावल के हवाले से कहा गया है कि अब तक 3,07,973 किसानों से 76,12,499 क्विंटल की खरीद की जा चुकी है।

मंत्री ने कहा कि खरीद प्रक्रिया निर्धारित एजेंसियों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसानों के बैंक खातों में भुगतान बिना किसी देरी के जमा किया जा रहा है।

रावल के अनुसार अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि किसानों को किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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