गैस आपूर्ति में दिककतों के बीच कोल इंडिया की सिनगैस इकाइयां लगाने की योजना

गैस आपूर्ति में दिककतों के बीच कोल इंडिया की सिनगैस इकाइयां लगाने की योजना

गैस आपूर्ति में दिककतों के बीच कोल इंडिया की सिनगैस इकाइयां लगाने की योजना
Modified Date: May 24, 2026 / 11:39 am IST
Published Date: May 24, 2026 11:39 am IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी कोल इंडिया लि. (सीआईएल) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच कोयले से सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

सिनगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका उपयोग बिजली, उर्वरक व ईंधन बनाने में होता है।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी इन संयंत्रों को या तो कोयला खदानों के पास (पिटहेड) लगाएगी या फिर उर्वरक संयंत्रों, गैस आधारित बिजलीघरों तथा डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) इकाइयों जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं के आसपास स्थापित करेगी।

देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठा दिए हैं। यह पहल राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और रसायन तथा कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी सिनगैस संयंत्रों को बनाओ-स्वामित्व रखो-चलाओ (बीओओ) अथवा बनाओ-चलाओ-देखरेख करो (बीओएम) मॉडल पर विकसित करने की योजना बना रही है। इन परियोजनाओं में डेवलपर या गठजोड़ कोयले से सिनगैस का उत्पादन करेंगे।

सिनगैस का उपयोग स्वच्छ ईंधन, उर्वरक, रसायन और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।

कोल इंडिया ने संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए रुचि पत्र (ईओआई) भी जारी किए हैं। इसके तहत कंपनी ने दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं।

पहले मॉडल के अंतर्गत कोल इंडिया की खदानों के क्षेत्रों में सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जहां से आसपास के औद्योगिक संकुलों को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये गैस की आपूर्ति होगी। इसका उद्देश्य कोयले के परिवहन पर आने वाली लागत को कम करना और उद्योगों को सस्ती दर पर सिनगैस उपलब्ध कराना है।

दूसरे मॉडल में सिनगैस उत्पादन इकाइयों को किसी गैस आधारित बिजलीघर, डीआरआई संयंत्र, उर्वरक इकाई या बड़े औद्योगिक उपभोक्ता के ठीक पास स्थापित किया जाएगा। इससे संचालन दक्षता और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से अंतिम उपभोक्ता को निर्बाध सिनगैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

कोल इंडिया संभावित औद्योगिक ग्राहकों की भी तलाश कर रही है, जो दीर्घकालिक समझौतों के तहत सिनगैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग कर सकें। इसके लिए कंपनी ने बाजार की रुचि, आपूर्ति मॉडल और व्यावसायिक अपेक्षाओं का आकलन करने को अलग से ईओआई जारी किया है।

भाषा अजय अजय

अजय


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