सहकारी बैंकों को प्रासंगिक, प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत: सचिव

सहकारी बैंकों को प्रासंगिक, प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत: सचिव

सहकारी बैंकों को प्रासंगिक, प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत: सचिव
Modified Date: June 25, 2026 / 09:12 pm IST
Published Date: June 25, 2026 9:12 pm IST

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) सहकारिता सचिव आशीष कुमार भूटानी ने बृहस्पतिवार को सहकारी बैंकों से कहा कि वे प्रासंगिक और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी मंच को अपनाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों को सामान्य प्रौद्योगिकी समाधान, मजबूत संचालन प्रणाली, बेहतर सेवा निष्पादन और बेहतर वित्तीय अनुशासन की जरूरत है।

सचिव ने श्रीनगर में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यूपीआई और डिजिटल वित्तीय सेवा के दौर में, सहकारी बैंकों को प्रासंगिक और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी मंच अपनाने होंगे।’’

उन्होंने कहा कि हालांकि नीतिगत ढांचा और संस्थागत समर्थन प्रणाली बनाने में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अगला चरण अमल में लाने, मापने योग्य नतीजों और जमीनी स्तर पर प्रभावी निष्पादन पर केंद्रित होना चाहिए।

एक सरकारी बयान में उनके हवाले से कहा गया, ‘‘अब समय आ गया है कि आंकड़ों से आगे बढ़कर सहकारिता क्षेत्र में गुणवत्ता, जवाबदेही, पेशेवर प्रबंधन और जमीनी स्तर पर दिखने वाले असर पर ध्यान दिया जाए।’’

भूटानी ने सहकारी खासकर डेयरी, कंप्रेस्ड बायोगैस और चीनी के सह-उत्पाद जैसे क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल उपायों पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘सहकारी संस्थान ग्रामीण कचरे को मूल्य में बदलने, स्वच्छ ऊर्जा का समर्थन करने, जैविक खाद की उपलब्धता बेहतर करने और सदस्यों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।’’

‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रौद्योगिकी, मॉडल उप-नियमों, व्यवसाय विविधीकरण और बेहतर प्रशासन के जरिए मजबूती लाना महत्वपूर्ण होगा।

आंकड़ा-आधारित प्रशासन के महत्व पर जोर देते हुए भूटानी ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस 2.0 सहकारी क्षेत्र में योजना, निगरानी और निर्णय लेने की प्रक्रिया को और मजबूत करेगा।

सम्मेलन में राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी समितियों के पंजीयक, राष्ट्रीय फेडरेशन, सहकारी संस्थान और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हुए।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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