होर्मुज से आवाजाही बहाल न होने पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है कच्चा तेलः रिपोर्ट

होर्मुज से आवाजाही बहाल न होने पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है कच्चा तेलः रिपोर्ट

होर्मुज से आवाजाही बहाल न होने पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है कच्चा तेलः रिपोर्ट
Modified Date: March 2, 2026 / 02:26 pm IST
Published Date: March 2, 2026 2:26 pm IST

नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष छिड़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर यातायात जल्द बहाल नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी ने सोमवार को यह अनुमान जताया।

इस जलमार्ग के बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति का 15 प्रतिशत और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सरकारी, सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से दूर रहने की चेतावनी दी।

बीमा कंपनियों ने भी मालवाहक जहाजों की कवरेज वापस ले ली है जिससे टैंकर की आवाजाही प्रभावी रूप से रुक गई।

हाल में हॉर्मुज के पास कम-से-कम तीन जहाजों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड आठ प्रतिशत से अधिक चढ़कर 78.72 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.20 डॉलर पर पहुंच गया।

वुड मैकेंज़ी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलन गेल्डर ने कहा, “यदि ऊर्जा निर्यात का प्रवाह जल्दी बहाल नहीं हुआ तो कीमतों के ऊपर जाने का भारी जोखिम है।”

उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दौर का हवाला देते हुए कहा कि आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। मौजूदा हालात में भी 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का स्तर संभव है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा।

इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ‘ओपेक प्लस’ ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है।

हालांकि, गेल्डर ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल नहीं होती तो यह निर्णय अप्रासंगिक हो सकता है।

वर्ष 2025 में करीब 8.1 करोड़ टन एलएनजी का निर्यात हॉर्मुज के जरिये हुआ था जो वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत है।

वुड मैकेंजी में गैस एवं एलएनजी शोध प्रमुख मासिमो दी ओदोआर्दो ने कहा कि आपूर्ति बाधित होने से एशिया और यूरोप के बीच उपलब्ध खेप के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यूरोप का गैस भंडार मौसमी औसत से नीचे है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि बाधा लंबी चली तो असर 1970 के दशक के पश्चिम एशिया के तेल प्रतिबंध जैसा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले की तुलना में तेल पर कम निर्भर है, लेकिन गंभीर आपूर्ति झटका कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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