शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे कच्चा तेल, वैश्विक संकेत और टीसीएस के तिमाही नतीजे: विश्लेषक

शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे कच्चा तेल, वैश्विक संकेत और टीसीएस के तिमाही नतीजे: विश्लेषक

शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे कच्चा तेल, वैश्विक संकेत और टीसीएस के तिमाही नतीजे: विश्लेषक
Modified Date: July 5, 2026 / 02:02 pm IST
Published Date: July 5, 2026 2:02 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) इस सप्ताह शेयर बाजार का रुख कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कंपनियों के तिमाही नतीजों की शुरुआत से तय होगा। विश्लेषकों ने यह कहा।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीसीएस नौ जुलाई को अपने जून तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित करेगी।

विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘निवेशक नौ जुलाई को आने वाले टीसीएस के तिमाही नतीजों पर करीबी नजर रखेंगे। इसमें मांग के रुझान, विवेकाधीन खर्च और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित व्यावसायिक अवसरों को लेकर प्रबंधन की टिप्पणियों पर विशेष ध्यान रहेगा।’

बीते सप्ताह बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 663.44 अंक यानी 0.86 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी में 214.85 अंक यानी 0.89 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक प्रवेश गौर ने कहा, ‘घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान नौ जुलाई से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों पर केंद्रित रहेगा। कंपनियों की आय के शुरुआती आंकड़े और प्रबंधन की टिप्पणियां मांग की स्थिति, मार्जिन के रुझान और कमाई की स्पष्टता के बारे में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करेंगी।’

उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और खरीफ फसलों की बुवाई ग्रामीण मांग, मुद्रास्फीति की उम्मीदों और वृहद आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि इसके स्थान के बारे में अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में बाधा की आशंकाएं कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 68-69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हुई हैं। ऊर्जा कीमतों में लगातार स्थिरता भारत में मुद्रास्फीति के परिदृश्य और बाह्य क्षेत्र के संतुलन के लिए सकारात्मक होगी।’

भाषा योगेश रमण

रमण


लेखक के बारे में