दिल्ली में कड़ाके की ठंड के साथ बिजली की मांग रिकॉर्ड 6,087 मेगावाट पर
दिल्ली में कड़ाके की ठंड के साथ बिजली की मांग रिकॉर्ड 6,087 मेगावाट पर
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली में शुक्रवार को सर्दियों के मौसम की अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग 6,087 मेगावाट दर्ज की गई। कड़ाके की ठंड के बीच बिजली की खपत बढ़ रही है। वितरण कंपनियों ने यह कहा।
बीएसईएस और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर डीडीएल) ने अपने-अपने क्षेत्रों में रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्व पूरा करने का दावा किया है।
बीएसईए ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10.39 बजे बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसने पिछले पांच वर्षों की सर्दियों की अधिकतम मांग 5,655 मेगावाट को पीछे छोड़ दिया। इसकी दो इकाइयों – बीआरपीएल (बीएसईएस राजधानी पावर लि.) और बीवाईपीएल (बीएसईएस यमुना पावर लि.) ने अपने आपूर्ति क्षेत्रों में क्रमशः 2,508 मेगावाट और 1,209 मेगावाट की मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया।
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रब्यूशन लि. ने बयान में कहा कि उसने अपने क्षेत्र (उत्तरी दिल्ली) में इस मौसम की अब तक की सर्वाधिक 1,862 मेगावाट की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया
आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में सर्दियों के दौरान बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। बीएसईएस क्षेत्रों में पिछले साल बीआरपीएल ने सर्दियों में 2,431 मेगावाट की अधिकतम मांग दर्ज की थी, जबकि बीवाईपीएल ने 1,105 मेगावाट का आंकड़ा छुआ था। इस सर्दी में बीआरपीएल के लिए मांग बढ़कर लगभग 2,570 मेगावाट और बीवाईपीएल के लिए लगभग 1,350 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
सर्दियों के महीनों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बीएसईएस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। इसमें लंबी अवधि के बिजली समझौते, नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता उपयोग, अन्य राज्यों के साथ बिजली की अदला-बदली, ऊर्जा भंडारण समाधान और मांग का उचित पूर्वानुमान शामिल है।
कंपनी ने कहा कि वह सर्दियों की बिजली मांग का आधे से अधिक हिस्सा सौर, पवन, जल विद्युत और अपशिष्ट-से-ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा कर रही है।
टाटा पावर-डीडीएल के प्रवक्ता ने कहा, “अभूतपूर्व मांग से निपटने के लिए बिजली खरीद और नेटवर्क तैयारियों को सक्रिय रूप से मजबूत किया गया है। दीर्घकालिक व्यवस्थाओं और स्मार्ट ग्रिड क्षमताओं से समर्थित हमारा विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो हमें मांग में तेज बढ़ोतरी का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाता है…।’’
भाषा पाण्डेय रमण
रमण

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