बुवाई में जल्दबाजी न करें, सामान्य बारिश का इंतजार करें: महाराष्ट्र के मंत्री की किसानों को सलाह
बुवाई में जल्दबाजी न करें, सामान्य बारिश का इंतजार करें: महाराष्ट्र के मंत्री की किसानों को सलाह
मुंबई, 24 जून (भाषा) महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने बुधवार को किसानों को सलाह दी कि राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून की शुरुआत के बावजूद वे बुवाई में जल्दबाजी न करें और मिट्टी की पर्याप्त नमी तथा सामान्य बारिश का इंतजार करें।
विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार बीमा, जलवायु-अनुकूल कृषि और अवसंरचना निवेश के माध्यम से किसानों को समर्थन देने के प्रयास तेज कर रही है।
भरणे ने कहा कि पिछले दो दिन में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है और उन्होंने पूरे राज्य में व्यापक वर्षा की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, ‘‘ किसानों को बुवाई में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्हें पहले अपने खेतों में नमी का स्तर जांचना चाहिए और मिट्टी की पर्याप्त नमी सुनिश्चित होने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए। हमें अगले तीन से चार दिन में अच्छी बारिश की उम्मीद है।’’
मंत्री ने साथ ही बताया कि कृषि विभाग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि अल नीनो के संभावित प्रभाव सहित मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने में किसानों की मदद की जा सके।
कपास की खेती का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित कपास उत्पादकता मिशन 2026-27 से 2030-31 तक महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा।
भरणे ने कृषि समृद्धि पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य कृषि में निवेश बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और कीटनाशक छिड़काव के लिए ड्रोन जैसी तकनीकों के उपयोग का विस्तार करना है।
फसल बीमा के संबंध में उन्होंने कहा कि 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत कर प्रभावित किसानों में वितरित किया जा चुका है, जबकि शेष 59 करोड़ रुपये का वितरण अभी प्रक्रियाधीन है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन किसानों को वास्तव में फसल नुकसान हुआ है, उन्हें बीमा लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।
संशोधित मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के तहत संतरा, मौसंबी, अनार, चीकू, अमरूद, नींबू, सीताफल और अंगूर जैसी फसलें शामिल हैं। एक सत्र के लिए इस योजना के तहत 45 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया है, जिसमें से 31 करोड़ रुपये पहले ही किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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