फास्टनर व्यापारियों ने बढ़ती लागत के बीच सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लेने की मांग की

फास्टनर व्यापारियों ने बढ़ती लागत के बीच सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लेने की मांग की

फास्टनर व्यापारियों ने बढ़ती लागत के बीच सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लेने की मांग की
Modified Date: May 10, 2026 / 03:19 pm IST
Published Date: May 10, 2026 3:19 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) फास्टनर व्यापारियों ने रविवार को सरकार से इस उत्पाद पर लागू गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) को वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि क्यूसीओ से लागत बढ़ रही है, आपूर्ति में कमी आ रही है और देश में उत्पादन बाधित हो रहा है।

व्यापारियों ने कहा कि फास्टनर का उत्पादन छोटी खेपों में लेकिन अधिक विविधता के साथ अक्सर एक ही मशीन पर किया जाता है। दूसरी ओर क्यूसीओ एक कठोर ‘एक उत्पाद – एक लाइसेंस’ प्रणाली थोपता है जिससे दोहराव, देरी और अनिश्चितता पैदा होती है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एमएसएमई (एफआईएसएमई) की केंद्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य शौनक रुंगटा ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले स्क्रू, विशेष रूप से ड्राईवॉल और चिपबोर्ड स्क्रू, इस वक्त भारत में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कंपनियों के पास व्यवहार्य घरेलू विकल्प नहीं बचे हैं।

उन्होंने कहा, ”क्यूसीओ की वजह से मेरी कंपनी का कारोबार पहले ही लगभग 50 प्रतिशत कम हो गया है, और लगातार देरी से व्यापार बंद होने का खतरा है। मैं सरकार से इस क्यूसीओ को वापस लेने का आग्रह करूंगा क्योंकि यह भारतीय विनिर्माण को भी प्रभावित करेगा।”

फास्टनर व्यापारी यूसुफ उंझावाला ने कहा कि इन उत्पादों पर बीआईएस प्रमाणन थोपने से विनिर्माण क्षेत्र प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि क्यूसीओ से केवल मुट्ठी भर निर्माताओं को लाभ हो रहा है, जबकि आपूर्ति श्रृंखला को चालू रखने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।

फास्टनर में नट, बोल्ट, स्क्रू, वॉशर, रिवेट्स और स्टड्स शामिल हैं, जो आकार, मजबूती, कोटिंग और उपयोग के आधार पर कई तरह के होते हैं। इनका इस्तेमाल वाहन, निर्माण, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, वैमानिकी और बुनियादी ढांचा सहित लगभग सभी विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाता है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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