पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी 70,000 करोड़ रुपये बढ़ने की आशंकाः अधिकारी
पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी 70,000 करोड़ रुपये बढ़ने की आशंकाः अधिकारी
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत बढ़ने से वित्त वर्ष 2026-27 में देश का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब 70,000 करोड़ रुपये बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण सब्सिडी व्यय बढ़ेगा लेकिन यह तय नहीं है कि वृद्धि कितने प्रतिशत होगी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी 70,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है, तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया।
अगर ऐसा होता है तो वित्त वर्ष 2026-27 में कुल उर्वरक सब्सिडी 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। इस साल के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
लागत संबंधी दबावों के बावजूद शर्मा ने कहा कि मौजूदा खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की उपलब्धता ‘संतोषजनक’ स्तर पर बनी हुई है। कुल 390 लाख टन उर्वरक की जरूरत के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक उपलब्ध है, जबकि बाकी जरूरत आयात के जरिये पूरी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि देश में उर्वरकों का मौजूदा भंडार 200.9 लाख टन है। घरेलू उत्पादन लगभग 80,000 टन प्रतिदिन की दर से चल रहा है।
हालांकि, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अब तक उत्पादन 86.2 लाख टन रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 93 लाख टन से थोड़ा कम है।
उन्होंने कहा, “उर्वरक उत्पादन में कुछ कमी है, जिसे आने वाले महीनों में पूरा कर लिए जाने की हमें उम्मीद है। यूरिया संयंत्रों के लिए गैस की आपूर्ति पर्याप्त है।’’
उर्वरक की आयात निर्भरता घटाने के मकसद से भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य की जगह वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति बढ़ाई है। अब तक 22 लाख टन से अधिक उर्वरक देश में आ चुके हैं।
उर्वरक की खरीद के लिए गठजोड़ (कंसोर्टियम) बनाने की व्यवस्था के तहत देश ने लगभग 13.5 लाख टन डीएपी, सात लाख टन एनपीके कॉम्प्लेक्स तथा अमोनियम सल्फेट, फॉस्फेट और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की है।
उर्वरक विभाग अन्य कच्चे माल की उपलब्धता की भी समीक्षा कर रहा है और सब्सिडी भुगतान एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिये साप्ताहिक आधार पर जारी किए जा रहे हैं।
शर्मा ने कहा, “कुल मिलाकर उर्वरक के मामले में स्थिति मजबूत, स्थिर और संतोषजनक है।”
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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