बाह्य क्षेत्र के लिए चुनौती पेश कर रहे वित्तीय हालात, कच्चे तेल के दामः आरबीआई बुलेटिन

बाह्य क्षेत्र के लिए चुनौती पेश कर रहे वित्तीय हालात, कच्चे तेल के दामः आरबीआई बुलेटिन

बाह्य क्षेत्र के लिए चुनौती पेश कर रहे वित्तीय हालात, कच्चे तेल के दामः आरबीआई बुलेटिन
Modified Date: May 22, 2026 / 07:21 pm IST
Published Date: May 22, 2026 7:21 pm IST

मुंबई, 22 मई (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वित्तीय हालात, कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी प्रवाह बाह्य क्षेत्र के परिदृश्य के लिए चुनौती बने हुए हैं। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक बुलेटिन में यह आकलन पेश किया गया।

आरबीआई बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया से जुड़ी अनिश्चितताओं की छाया बनी हुई है।

लेख कहता है कि अप्रैल में घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी रही, जहां औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के कई खंडों में मजबूती देखी गई। कृषि क्षेत्र में मानसून-पूर्व बारिश के सामान्य से अधिक रहने और जलाशयों के संतोषजनक स्तर को देखते हुए ग्रीष्मकालीन बुवाई अच्छी रही।

इसके मुताबिक, अप्रैल में खाद्य कीमतें बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई जबकि मुख्य मुद्रास्फीति स्थिर रही।

पश्चिम एशिया का संघर्ष जिंस बाजारों, वैश्विक व्यापार प्रवाह और आपूर्ति शृंखलाओं पर लगातार दबाव डाल रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।

लेख में कहा गया, ‘‘भारत मजबूत वृहद आर्थिक आधार के साथ इस दौर में कदम रख रहा है। घरेलू मांग से वृद्धि को प्रमुख रूप से समर्थन मिल रहा है, लेकिन निकट अवधि का परिदृश्य आपूर्ति पक्ष के दबावों के कारण कुछ हद तक प्रभावित है।”

सकल मुद्रास्फीति संतोषजनक स्तर के दायरे के भीतर बनी हुई है, लेकिन घरेलू कीमतों पर इसके प्रभाव की निगरानी जरूरी है।

इसमें कहा गया, “वित्तीय परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी प्रवाह बाह्य क्षेत्र के परिदृश्य के लिए चुनौती बने हुए हैं।”

हालांकि मजबूत सेवा निर्यात, शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सकारात्मक प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त स्तर और सरकार एवं आरबीआई के सक्रिय नीतिगत कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में मददगार होंगे।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और केंद्रीय बैंक के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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