वित्तीय सेवा सचिव ने एआई मॉडल ‘माइथोस’ से उपजे जोखिम को लेकर बैंकों को चेताया

वित्तीय सेवा सचिव ने एआई मॉडल 'माइथोस' से उपजे जोखिम को लेकर बैंकों को चेताया

वित्तीय सेवा सचिव ने एआई मॉडल ‘माइथोस’ से उपजे जोखिम को लेकर बैंकों को चेताया
Modified Date: May 7, 2026 / 04:42 pm IST
Published Date: May 7, 2026 4:42 pm IST

मुंबई, सात मई (भाषा) वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू ने बृहस्पतिवार को बैंकों से अपनी साइबर सुरक्षा एवं परिचालन मजबूती को सुदृढ़ करने का आह्वान करते हुए कहा कि एंथ्रोपिक माइथोस जैसे उन्नत कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की स्थिति में बैंकिंग प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।

नागराजू ने यहां ‘भारतीय बैंक संघ’ (आईबीए) की तरफ से आयोजित जोखिम प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि बैंकिंग समुदाय इस स्थिति के लिए तैयार है, अगर ‘माइथोस’ देश में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है।”

उन्होंने साइबर सुरक्षा के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि एआई कंपनी एंथ्रोपिक का ‘माइथोस’ मॉडल सिस्टम की पहचान करने और संभावित रूप से उसका दुरुपयोग करने की उन्नत क्षमता रखता है। इसने पुराने बैंकिंग तकनीकी ढांचे में मौजूद खामियों के कारण नियामकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

नागराजू ने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थान अपने आपस में जुड़े सिस्टम, पुराने आईटी ढांचे पर निर्भरता और वास्तविक समय में संचालन के कारण अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “एक सफल साइबर हमला विभिन्न संस्थानों और बाजारों में तेजी से फैल सकता है।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब परिचालन में निरंतरता वित्तीय स्थिरता का केंद्रीय तत्व बन गई है।

नागराजू ने बैंकों से अपनी तैयारियों का लगातार परीक्षण करने, साइबर क्षमताओं में निवेश बढ़ाने, घटनाओं से निपटने की प्रणाली को मजबूत करने और व्यवसाय निरंतरता योजनाओं को व्यावहारिक, अद्यतन एवं नियमित रूप से अभ्यास में लाने को कहा।

वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि अब जोखिम केवल लेनदेन के ब्योरा या बहीखाते तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाओं, साइबर खतरों, परिचालन बाधाओं, धोखाधड़ी, तीसरे पक्ष पर निर्भरता, जलवायु संबंधी कारकों, बाजार में उतार-चढ़ाव और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से भी उत्पन्न हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “ऐसे माहौल में जोखिम प्रबंधन को केवल अनुपालन या नियंत्रण के पूरक के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इसे एक रणनीतिक क्षमता के रूप में विकसित करना होगा।”

नागराजू ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें मजबूत बहीखाता, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, सुदृढ़ पूंजी स्थिति और बेहतर प्रशासनिक मानक शामिल हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


लेखक के बारे में