जैकेट से लेकर आयुर्वेद तक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दिल्ली वालों को मिल रहा सब कुछ

जैकेट से लेकर आयुर्वेद तक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दिल्ली वालों को मिल रहा सब कुछ

जैकेट से लेकर आयुर्वेद तक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दिल्ली वालों को मिल रहा सब कुछ
Modified Date: November 25, 2025 / 07:29 pm IST
Published Date: November 25, 2025 7:29 pm IST

नयी दिल्ली, 25 नवंबर (भाषा) ठंड बढ़ने और प्रदूषण से लगातार गले में संक्रमण का सामना कर रहे दिल्लीवासियों को यहां भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2025 में सर्दियों के कपड़ों से लेकर आयुर्वेदिक दवाओं तक सबकुछ मिल रहा है।

मेले में आए कई लोगों ने कहा कि वे सिर्फ घूमने या गर्म कपड़े खरीदने आए थे, लेकिन उन्होंने हर्बल दवाएं खरीद लीं।

अपने परिवार के साथ मेले में आए वसंत विहार के रहने वाले अमर सिंह ने बताया, ”मैं जैकेट लेने आया था… लेकिन हम सभी के गले में कई दिनों से दर्द है और मैं एलोपैथिक दवा नहीं ले सकता। जब मैंने यहां आयुर्वेदिक स्टॉल देखे तो मैंने इसके लिए काढ़ा ले लिया।”

विद्यार्थी कुणाल वर्मा ने कहा कि वह रिश्तेदारों के साथ आए थे। उन्होंने बताया, ”मेरा गला खराब है और मुझे हर समय खांसी आ रही है। सर्दी और प्रदूषण मेरी प्रतिरोधक क्षमता को खराब कर रहे हैं इसलिए मैंने कुछ ड्रॉप खरीदे। जब सब कुछ एक ही जगह पर हो, तो यह आसान होता है।”

मंजीत सिंह ने कहा कि वह अपने माता-पिता के लिए साबुन और लोशन खरीदने आयुर्वेद काउंटर पर गए थे, क्योंकि इसके ‘साइड इफेक्ट’ कम हैं।

उन्होंने आगे कहा, ”घर पर हर कोई पारंपरिक इलाज पसंद करता है इसलिए मैंने एक मफलर के साथ कुछ दवाएं भी खरीदीं।”

भारत मंडपम में 14 नवंबर को शुरू हुए चौदह दिन के इस मेले में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विषय के तहत 3,500 से ज्यादा भागीदार शामिल हुए हैं। यह जगह जीवंत भारत की तरह दिखती है, जिसमें शिल्प, छोटे उद्योग, खेती के उत्पाद, स्टार्टअप और राज्यों के खास स्टॉल लगे हैं।

मेले में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली महिला उद्यमियों और कारीगरों के स्टॉल भी लगे हैं। इनमें पद्मश्री शहनाज हुसैन का हर्बल और आयुर्वेदिक ब्यूटी ब्रांड भी शामिल है, जिसके स्टॉल पर खरीदारों की लगातार भीड़ लगी रही।

राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले कारीगरों ने दुर्लभ पारंपरिक कला के रूप भी दिखाए। उनमें से एक, दलवई शिवम्मा हैं, जो चमड़े पर कलाकारी के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया कि उनका परिवार हजार साल से भी ज्यादा समय से ‘शैडो-थिएटर’ परंपरा का पालन कर रहा है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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