एफएसएसएआई ने पौध आधारित उत्पादों के लेबल पर क्यूआर कोड लगाने की अपील की
एफएसएसएआई ने पौध आधारित उत्पादों के लेबल पर क्यूआर कोड लगाने की अपील की
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण एफएसएसएआई ने बुधवार को पौध आधारित (पौधों से बने) खाद्य निर्माताओं से अपील की कि वे अपने उत्पादों के लेबल पर क्यूआर कोड अपनाएं। प्राधिकरण ने कहा कि मौजूदा लेबल इतने छोटे होते हैं कि उपभोक्ताओं के लिए उन्हें पढ़ना मुश्किल होता है। प्राधिकरण का मकसद इस तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र के प्रति विश्वास पैदा करना है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रजित पुन्हानी ने चौथे पौध-आधारित खाद्य सम्मेलन में कहा कि प्राधिकरण क्यूआर कोड को अनिवार्य नहीं बनाना चाहता, बल्कि चाहता है कि कंपनियां स्वेच्छा से इस तकनीक को अपनाएं, ताकि युवा उपभोक्ता कोड स्कैन करके सामग्री की सूची और पोषण संबंधी जानकारी की पुष्टि कर सकें।
पुन्हानी ने कहा, ‘‘लेबल बहुत छोटा होता है, उसे पढ़ना और समझना मुश्किल होता है।’’ उन्होंने कहा कि खासकर ‘जेन जी’ (युवा पीढ़ी) के उपभोक्ताओं को कोड स्कैन करके अपनी दैनिक पोषण संबंधी ज़रूरतों की जांच करने से काफी फायदा हो सकता है।
पुन्हानी ने स्वीकार किया कि पौध-आधारित आहार के स्वास्थ्य लाभों को लेकर खाद्य उद्योग और चिकित्सा समुदाय, दोनों की ओर से प्राधिकरण पर अलग-अलग तरह का दबाव रहता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत जानकारियों ने एफएसएसएआई के सार्वजनिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाने का काम और भी मुश्किल बना दिया है।
एफएसएसएआई ने पौध-आधारित उत्पादों के लिए पहले ही एक खास ‘वीगन लोगो’ और नियामकीय ढांचा पेश कर दिया है। इसके ज़रिये व्यवसायों को नियमों का पालन करने के आसान तरीके मिलते हैं, वहीं उपभोक्ताओं के लिए उत्पादों की पहचान करना भी आसान हो जाता है।
पुन्हानी ने बताया कि यह ढांचा प्राधिकरण और उद्योग जगत के बीच ‘साझा ज़िम्मेदारी’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत, कंपनियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने उत्पादों पर सही जानकारी (सच्चे लेबल) दें और स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी दावे के पीछे वैज्ञानिक आधार ज़रूर पेश करें।
प्राधिकरण ने खाद्य स्थिरता और वैश्विक निर्यात में प्रतिस्पर्धा को भी अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है। प्राधिकरण का कहना है कि भारत का लक्ष्य खुद को ‘‘मानकों पर आधारित, टिकाऊ खाद्य नवाचार के एक प्रमुख केंद्र’’ के रूप में स्थापित करना है।
पुन्हानी ने कहा, ‘‘अब वह ज़माना चला गया, जब हर देश और वहां की स्थानीय आबादी सिर्फ अपने देश में बने भोजन तक ही सीमित रहती थी।’’ उन्होंने चेतावनी दी कि खाद्य सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक से स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है, व्यापार में रुकावट आ सकती है और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच सकता है।
पुन्हानी ने विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी सहयोग और अनुसंधान में ज़्यादा निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ नियमों-कानूनों के सहारे पौध-आधारित क्षेत्र में बदलाव लाना संभव नहीं है।
पौध-आधारित खाद्य उद्योग संघ (पीबीएफआईए) के कार्यकारी निदेशक प्रवीर श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत में पौध-आधारित खाद्य पदार्थों का एक वैश्विक केंद्र बनने की अपार क्षमता है। इसकी मुख्य वजह है – भारत का मज़बूत कृषि आधार, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने वाला माहौल और स्वास्थ्य व स्थिरता को लेकर उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता।’’
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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