गडकरी ने बीआरओ की सड़क परियोजनाओं के पूरा होने में देरी पर चिंता जताई
गडकरी ने बीआरओ की सड़क परियोजनाओं के पूरा होने में देरी पर चिंता जताई
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा सड़क बनाने में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में राजमार्ग परियोजनाओं के तेजी से निष्पादन के लिए प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत बतायी।
गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को निर्णय लेने की प्रक्रिया में और तेजी लाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ”पहले मुझे हिचकिचाहट महसूस होती थी, जब बीआरओ के अधिकारी वर्दी में मिलने आते थे। मैंने उनसे नागरिक वेशभूषा में आने का अनुरोध किया। रक्षा बलों की छवि क्या है – अनुशासित रहना और समय पर निर्णय लेना।”
मंत्री ने कहा, ”सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं, और परियोजनाओं की लागत भी बढ़ रही है।”
बीआरओ रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करता है। वर्ष 1960 में स्थापित बीआरओ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और पड़ोसी देशों में सड़क नेटवर्क और रणनीतिक बुनियादी ढांचे का विकास और रखरखाव करता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि राजमार्ग मंत्रालय एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है जिसके तहत अधिग्रहित किए जा रहे भूखंडों पर बने घर की सही लागत तय की जा सके। उन्होंने निर्णय लेने में देरी, खराब योजना और जवाबदेही की कमी को परियोजना में देरी और लागत बढ़ने का मुख्य कारण बताया।
गडकरी ने कहा, ”भूमि अधिग्रहण और अनुमति में देरी जैसे छोटे मुद्दे भी बड़े नुकसान का कारण बनते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि कई बार ठेकेदार खराब गुणवत्ता का काम करते हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती क्योंकि गड़बड़ी दुरूस्त करने की जिम्मेदारी की अवधि केवल कागजों पर रह जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे ठेकेदारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और यदि आवश्यक हो, तो उन्हें काली सूची में डाल दिया जाना चाहिए।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण

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