सरकार ने हाइड्रोजन, एलपीजी, सीएनजी ‘डिस्पेंसर’ के सत्यापन नियमों में किया संशोधन
सरकार ने हाइड्रोजन, एलपीजी, सीएनजी ‘डिस्पेंसर’ के सत्यापन नियमों में किया संशोधन
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने हाइड्रोजन, रसोई गैस (एलपीजी), तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) ईंधन वितरण इकाइयों (डिस्पेंसर) के सत्यापन के लिए सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों को अनुमति देने को विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन किया है।
स्वच्छ ईंधन के बढ़ते उपयोग के बीच यह कदम देश में माप-तौल निगरानी व्यवस्था का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने विधिक माप विज्ञान (सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन किया है।
इसके साथ ही सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के माध्यम से सत्यापित किए जाने वाले उपकरणों की श्रेणियों की संख्या 18 से बढ़कर 23 हो गई है।
संशोधित नियमों के तहत पेट्रोल और डीजल वितरण इकाइयों के सत्यापन शुल्क को 5,000 रुपये प्रति नोजल निर्धारित किया गया है, जबकि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन वितरण इकाइयों के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये प्रति नोजल होगा।
‘नोजल’ ईंधन भरने वाले पाइप के सिरे पर लगा वह उपकरण होता है, जिससे पेट्रोल, डीजल, सीएनजी आदि वाहन में भरे जाते हैं।
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘इस कदम से सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने, कार्यकुशलता में सुधार होने और देशभर में स्वच्छ ईंधनों को अपनाने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।’’
जीएटीसी सरकार से मान्यता प्राप्त निजी केंद्र होते हैं, जिनके पास विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत निर्धारित माप एवं तौल उपकरणों के सत्यापन और पुनः सत्यापन की तकनीकी विशेषज्ञता होती है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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