सरकार ने खाद्य तेलों की पैकिंग के मानक आकार तय किए

सरकार ने खाद्य तेलों की पैकिंग के मानक आकार तय किए

सरकार ने खाद्य तेलों की पैकिंग के मानक आकार तय किए
Modified Date: June 6, 2026 / 05:28 pm IST
Published Date: June 6, 2026 5:28 pm IST

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खाद्य तेलों के पैक के लिए तय आकार निर्धारित किए हैं, ताकि उपभोक्ता अलग-अलग ब्रांडों की कीमत आसानी से तुलना कर सकें और सही खरीद फैसला ले सकें।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, विभाग ने खाद्य तेलों एवं वसा के शुद्ध मात्रा निर्धारण तथा मानक पैक आकार से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में संशोधन किया है। इसके तहत विनिर्माताओं, पैक करने वालों और आयातकों को नए नियमों का पालन करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

संशोधित एसओपी में प्रमुख खाद्य तेलों के लिए नौ मानक पैक आकार तय किए गए हैं। इनमें 200 मिलीलीटर/ ग्राम, 500 मिलीलीटर/ ग्राम, एक लीटर/ किलोग्राम, दो लीटर/ किलोग्राम, तीन लीटर/ किलोग्राम, चार लीटर/ किलोग्राम, पांच लीटर/ किलोग्राम, 15 लीटर/ किलोग्राम और 20 लीटर/ किलोग्राम शामिल हैं।

यह नियम पाम, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कपास बीज और मक्का तेल सहित मिश्रित खाद्य तेलों पर लागू होगा।

यह निर्णय देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संगठनों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लिया गया है।

नए मानकों के तहत, यदि खाद्य तेल की मात्रा आयतन में दर्शाई जाती है, तो पैक पर उसका समकक्ष वजन भी स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा, जैसा कि विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में प्रावधान है।

ये प्रावधान देश में निर्मित और आयातित दोनों प्रकार के खाद्य तेलों पर लागू होंगे।

हालांकि 200 मिलीलीटर/ ग्राम से छोटे आकार वाले पैक और कुछ छोटे स्तर के खाद्य तेलों को मानक पैक आकार के नियम से छूट दी गई है। ऐसा सस्ती छोटी पैकिंग की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए किया गया है।

विभाग ने कहा कि जो कंपनियां तय समय-सीमा से पहले ही इन मानक पैक आकारों को अपनाना चाहती हैं, वे तुरंत ऐसा कर सकती हैं।

भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “इससे बाजार में व्यवस्था बेहतर होगी और सभी कंपनियों के लिए समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा।”

उन्होंने कहा, “उद्योग को स्वतंत्रता करने के लिए गैर-मानकीकरण की व्यवस्था की गई थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इससे बाजार में असंतुलन पैदा हुआ और अलग-अलग पैक के कारण उपभोक्ताओं में भ्रम बढ़ा।”

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम


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