कोविड-19 की चुनौतियों से निपटने के लिए नयी उद्योग नीति पेश करेगी मप्र सरकार

कोविड-19 की चुनौतियों से निपटने के लिए नयी उद्योग नीति पेश करेगी मप्र सरकार

कोविड-19 की चुनौतियों से निपटने के लिए नयी उद्योग नीति पेश करेगी मप्र सरकार
Modified Date: November 29, 2022 / 07:57 pm IST
Published Date: November 27, 2020 11:33 am IST

इंदौर, 27 नवंबर (भाषा) कोविड-19 से पैदा मुश्किलों से जूझ रहे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार अगले महीने नयी उद्योग नीति पेश करने की तैयारी कर रही है।

महामारी के संकट की पृष्ठभूमि में राज्य के एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने शुक्रवार को यहां उद्योग जगत के नुमाइंदों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं को बताया, ‘हम मौजूदा वक्त की जरूरतों के मुताबिक नयी उद्योग नीति को आकार दे रहे हैं ताकि एमएसएमई क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। उम्मीद है कि यह नीति दिसंबर में पेश कर दी जाएगी।’

उन्होंने बताया कि वास्तविक मुसीबतों के कारण बीमार होने के बाद बंद पड़ीं औद्योगिक इकाइयों की मदद कर उनमें उत्पादन बहाल कराने के नीतिगत उपाय भी किए जाएंगे

सखलेचा ने बताया, ‘हम देश में अपनी तरह की पहली एक्जिट पॉलिसी भी बना रहे हैं जिसके तहत इस बात के प्रावधान किए जाएंगे कि बंद इकाइयां किस तरह कारोबार से बाहर निकल सकती हैं? राज्य में स्पष्ट एक्जिट पॉलिसी होना वक्त की मांग है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि बंद इकाइयों के चलते औद्योगिक क्षेत्रों में बरसों-बरस जमीनें फंसी रहती हैं। ये इकाइयां कानूनी झमेलों से भी घिर जाती हैं।’

एमएसएमई मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पिछले एक महीने के दौरान बड़ी तेजी से सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा, ‘आगामी जनवरी में आप राज्य में एमएसएमई क्षेत्र में बड़ी तादाद में नयी इकाइयां शुरू होते देखेंगे।’

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के बड़े शहरों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए लगाए गए रात के कर्फ्यू की पाबंदियों से हर क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों को छूट दी गई है और ‘वे पूरे 24 घंटे और हफ्ते के सातों दिन चल सकती हैं।’

सखलेचा के पास विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भी है। उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के संकट ने हमें छोटे शहरों में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के बड़े मौके मुहैया कराए हैं। लिहाजा इंदौर के साथ ही भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में भी इस क्षेत्र के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।’

भाषा हर्ष

अर्पणा मनोहर

मनोहर


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