नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार उन ठेकेदारों को कुछ वित्तीय सहायता देने की योजना बना रही है जो अपने परियोजना स्थल पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास उपलब्ध कराते हैं।
भवन निर्माण सामग्री से जुड़ी चार दिन की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘भारत बिल्डकॉन’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार रियल एस्टेट और विनिर्माण कंपनियों के लिए इमारतों का टिकाऊपन प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य करने पर विचार कर रही है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत विकास के महत्व पर भी जोर दिया और बिल्डरों से अपनी परियोजनाओं में अपशिष्ट प्रबंधन तथा जल संरक्षण सुनिश्चित करने को कहा।
मनोहर लाल ने कहा कि राज्य सरकारें ठेकेदारों से श्रम उपकर (अनुबंध मूल्य का एक प्रतिशत) वसूलती हैं, जिसका उपयोग मुख्य रूप से विनिर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसी योजना तैयार कर रही है जिसके तहत उन ठेकेदारों को कुछ वित्तीय सहायता दी जाएगी जो विनिर्माण अवधि के दौरान श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास उपलब्ध कराते हैं। यह सहायता श्रम उपकर कोष से दी जाएगी और योजना जल्द घोषित की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ऐसी इमारतों को भी ध्वस्त करना पड़ा है जिन्हें ‘रहने योग्य नहीं’ घोषित किया गया था। इसी को देखते हुए मंत्रालय भवनों के लिए टिकाऊपन प्रमाणपत्र अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है।
उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि जब तक सरकार इसे अनिवार्य नहीं करती, तब तक वे खुद से ऐसे प्रमाण पत्र जारी करना शुरू करें।
भाषा
योगेश अजय
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