गर्मी की फसल की आवक से मूंगफली तेल-तिलहन में गिरावट, बाकी खाद्य तेल स्थिर

गर्मी की फसल की आवक से मूंगफली तेल-तिलहन में गिरावट, बाकी खाद्य तेल स्थिर

गर्मी की फसल की आवक से मूंगफली तेल-तिलहन में गिरावट, बाकी खाद्य तेल स्थिर
Modified Date: July 1, 2026 / 10:04 pm IST
Published Date: July 1, 2026 10:04 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) मूंगफली की गर्मी की फसल की आवक के कारण देश के तेल-तिलहन बाजारों में बुधवार को मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट रही। नदारद मांग और सुस्त कामकाज के बीच सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम स्थिर रहे।

मलेशिया एक्सचेंज सुधार के साथ बंद हुआ। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ जारी है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि वैसे बाजार में सभी खाद्य तेलों की मांग कमजोर है। इस बीच, बाजार में मूंगफली की गर्मी की फसल के आवक के बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट आई। मूंगफली का दाम पहले से अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है। इसके अलावा गर्मी की फसल की आवक बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट आई।

सुस्त कामकाज के बीच सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि आयातकों, रिफाइनिंग कंपनियों और व्यापारियों द्वारा लागत से नीचे दाम पर की जा रही बिकवाली से जो नुकसान हो रहा है, वह अंतत: ज्यादातर सरकारी बैंकों का नुकसान है यानी एक तरह से आम जनता के पैसों का ही नुकसान है।

उन्होंने कहा कि कांडला बंदरगाह पर सोयाबीन डीगम का दाम 118.50 रुपये किलो पड़ता है। इस पर रिफाइनिंग कंपनियों को ल्रगभग 20 रुपये प्रति किलो की ड्यूटी देनी पड़ती है। इस आयात शुल्क का भुगतान करने के बाद दाम बैठता है- 138.50 रुपये किलो। बाजार में व्यापारियों का यह माल 140 रुपये किलो के भाव बिकना मुश्किल हो रहा है।

सूत्रों ने कहा कि यही हाल सीपीओ और पामोलीन का भी है। सीपीओ का आयात इसलिए हो रहा है कि यहां की रिफाइनिंग कंपनियां परिचालन में रहें। सीपीओ के प्रसंस्करण में 7-7.50 रुपये किलो की लागत बैठती है। इन सबके बाद सीपीओ से बने रिफाइंड पामोलीन का जो दाम बैठता है, उसके मुकाबले मलेशिया से सीधा पामोलीन आयात करना कहीं अधिक सस्ता है क्योंकि मलेशिया में पामोलीन का दाम यहां के मुकाबले काफी सस्ता है। इन सब प्रक्रियाओं के बाद भी खाद्य तेल लागत से नीचे दाम बिके, तो चिंता करने की जरूरत है। ऐसे में सरकार जो विदेशी मुद्रा खर्च कर रही है, वह खर्च सीपीओ के बजाय पामोलीन का आयात करने से काफी घट सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत स्पष्टता के साथ इस बारे में फैसला करना होगा कि देश तेल-तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता की ओर कैसे बढ़े।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,550-7,575 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,575-7,150 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,300 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,445-2,745 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,570-2,670 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,570-2,715 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,750 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,300 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,050 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 6,950-7,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 6,800-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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