औद्योगिक विकास एवं एमएसएमई सशक्तीकरण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

औद्योगिक विकास एवं एमएसएमई सशक्तीकरण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

औद्योगिक विकास एवं एमएसएमई सशक्तीकरण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
Modified Date: February 4, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: February 4, 2026 9:57 pm IST

लखनऊ, चार फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और कुटीर, लघु तथा मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को और मजबूत करने की रणनीति बनाने के लिये औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने लघु उद्योग भारती के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में प्रदेश के एमएसएमई और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री भी मौजूद थे।

राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक इस दौरान उत्तर प्रदेश में समग्र रूप से औद्योगिक विकास को गति देने, क्रियाशील एमएसएमई उद्योगों को सशक्त बनाने तथा औद्योगिक भूखंड आवंटन एवं औद्योगिक संचालन से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं निवेशक-अनुकूल बनाने के विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में औद्योगिक भूखंड आवंटन प्रक्रिया में सुधार, रद्द किए गए भूखंडों के पुनः आवंटन, औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास, लीज रेंट एवं रखरखाव शुल्क की उचित व्यवस्था, स्टार्टअप एवं पुरानी औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिकता, प्रदूषण नियंत्रण तथा लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि औद्योगिक भूखंड आवंटन से संबंधित अनावश्यक मुकदमेबाजी को न्यूनतम किए जाने तथा आवंटित भूमि का समयबद्ध एवं प्रभावी औद्योगिक/व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बयान के मुताबिक, बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि सरदार वल्लभभाई पटेल योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 100 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है, जहां प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर चरणबद्ध क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास किया जाएगा, जिससे सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को शीघ्र स्थापित होने में सुविधा प्राप्त होगी।

संवाद के दौरान लघु उद्योग भारती द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से संबंधित विभिन्न नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए। इनमें उद्योग-हितैषी भूखंड आवंटन व्यवस्था, क्लस्टर आधारित विकास, प्लग-एंड-प्ले आधार पर शेड एवं फ्लैटेड फैक्ट्री की उपलब्धता, लीज शर्तों का सरलीकरण, वित्तीय संस्थानों से ऋण सुविधा, बुनियादी अवसंरचना, भवन मानचित्र स्वीकृति, उत्पादन प्रारंभ करने की समयसीमा, कर एवं रखरखाव शुल्क में एकरूपता तथा ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली जैसे विषय शामिल रहे।

बयान के अनुसार, लघु उद्योग भारती ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि प्रदेश में कार्यरत पुरानी एमएसएमई इकाइयों को और अधिक प्रोत्साहित किए जाने, उन्हें सुदृढ़ बनाने तथा श्रेष्ठ औद्योगिक प्रथाओं को अपनाते हुए तकनीकी रूप से उन्नत किए जाने की आवश्यकता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धात्मक रूप से अधिक सक्षम बन सकें।

समीक्षा में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि औद्योगिक भूखंड आवंटन एवं औद्योगिक नीतियां उद्योगों के लिए व्यावहारिक, सरल एवं निष्पक्ष हों, ताकि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों पर अनावश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक भार न पड़े और औद्योगिक गतिविधियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने भी एमएसएमई, खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने तथा उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिये सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

भाषा सलीम राजकुमार अजय

अजय


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