परिवारों पर कर्ज सितंबर, 2025 में जीडीपी के 45.5 प्रतिशत तक पहुंचा: रिपोर्ट
परिवारों पर कर्ज सितंबर, 2025 में जीडीपी के 45.5 प्रतिशत तक पहुंचा: रिपोर्ट
मुंबई, 30 जून (भाषा) गैर आवासीय खुदरा ऋण में बढ़ोतरी के कारण परिवारों पर कुल कर्ज देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 45.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में यह खुलासा हुआ है।
आरबीआई ने कहा कि परिवारों पर कर्ज में बढ़ोतरी की वजह गैर-आवासीय खुदरा ऋण में हुई वृद्धि थी, जो मार्च, 2026 तक कुल कर्ज का 58.4 प्रतिशत था। समय के साथ इन ऋणों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। इसने आवास, कृषि तथा कारोबारी ऋणों की तुलना में तेज गति प्राप्त की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, परिवारों पर कर्ज में बढ़ोतरी के बावजूद, उधार लेने वालों की ‘प्रोफ़ाइल’ में सुधार जारी है। बकाया राशि और उधार लेने वालों की संख्या, दोनों ही मामलों में बेहतर रेटिंग वाले उधारकर्ताओं (प्राइम और उससे ऊपर) की हिस्सेदारी बढ़ी है।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2023 से देश में परिवारों पर कर्ज का जीडीपी में हिस्सा उसके पांच वर्ष के औसत 42.9 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञ लगातार परिवारों पर कर्ज में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका मानना है कि परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा ऐसे ऋणों की किस्त चुकाने में खर्च हो रहा है, जिनसे खरीदी गई परिसंपत्तियों, जैसे वाहन का मूल्य समय के साथ घटता जाता है।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं में घरेलू कर्ज के मामले में भारत चौथे स्थान पर है। थाइलैंड में परिवारों पर कर्ज जीडीपी का 87.3 प्रतिशत, मलेशिया में 69.9 प्रतिशत और चीन में 59 प्रतिशत है।
भाषा यासिर अजय
अजय

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