फैकल्टी की कमी को दूर करेगा आईआईएफआर, वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को देगा बढ़ावा

फैकल्टी की कमी को दूर करेगा आईआईएफआर, वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को देगा बढ़ावा

फैकल्टी की कमी को दूर करेगा आईआईएफआर, वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को देगा बढ़ावा
Modified Date: April 19, 2026 / 10:38 am IST
Published Date: April 19, 2026 10:38 am IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) भारत में वैश्विक स्तर की नेतृत्व वाली प्रतिभाओं की तलाश के बीच विश्वस्तरीय फैकल्टी यानी शिक्षकों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से एक नए संस्थान की स्थापना की गई है। यह संस्थान आइवी लीग स्तर के शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारियों को राष्ट्रीय राजधानी में एक ‘कैंपस’ में लाने की योजना पर काम करेगा।

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के पूर्व डीन राजेंद्र श्रीवास्तव की अगुवाई वाला इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर फैकल्टी एंड रिसर्च (आईआईएफआर) संस्थान नयी दिल्ली स्थित भारतीय विद्या भवन परिसर में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य फैकल्टी की कमी के अंतराल को पाटना, उद्योग से संपर्क तथा अनुप्रयुक्त शोध में मौजूद कमियों को दूर करना है।

संस्थान की शुरुआत के अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्तित्व विकास की आधारशिला है और शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार अत्यंत आवश्यक है।

श्रीवास्तव ने कहा, “भारत वैश्विक नेतृत्व प्रतिभा तैयार कर रहा है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित करने वाले शिक्षकों को कौन तैयार करेगा?” उन्होंने बताया कि आईआईएफआर का लक्ष्य ऐसे ‘प्रैकाडेमिक्स’ तैयार करना है, जो शैक्षणिक दक्षता और औद्योगिक अनुभव का समन्वय रखते हों।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के तहत उच्च शिक्षा में व्यापक सुधार लागू किए जा रहे हैं। इसमें बहु-विषयक शिक्षा, शोध और उद्योग के साथ सहयोग पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सीमित शोध, फैकल्टी की कमी और कमजोर उद्योग-अकादमिक समन्वय जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान खींचा है।

आईआईएफआर इस वर्ष अपना पहला कार्यक्रम शुरू करेगा। ‘एजुकेटर्स सर्टिफिकेट प्रोग्राम’ (ईसीपी) 15 जुलाई से शुरू होगा, जबकि ‘एक्जिक्यूटिव फेलो इन मैनेजमेंट’ (ईएफएम) कार्यक्रम एक अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। प्रत्येक कार्यक्रम में शुरुआत में लगभग 25 भागीदारों को शामिल किया जाएगा।

ईसीपी एक आठ दिन का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा, जिसमें पाठ्यक्रम डिजाइन, पढ़ाने के तरीकों और शिक्षण व शोध में कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं ईएफएम कार्यक्रम वरिष्ठ पेशेवरों और शिक्षाविदों पर केंद्रित है। इसमें कारोबारी नवोन्मेषण, कामकाज के संचालन, भू-राजनीतिक, वैश्विक वाणिज्यिक कानून तथा उत्पाद और बाजार विकास में एआई के उपयोग जैसे विषय शामिल होंगे।

भाषा अजय अजय

अजय


लेखक के बारे में