सेमीकॉन इंडिया में दुनिया की कई कंपनियों ने भारत में निवेश की मंशा जताई

सेमीकॉन इंडिया में दुनिया की कई कंपनियों ने भारत में निवेश की मंशा जताई

सेमीकॉन इंडिया में दुनिया की कई कंपनियों ने भारत में निवेश की मंशा जताई
Modified Date: September 20, 2026 / 12:35 pm IST
Published Date: September 20, 2026 12:35 pm IST

नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) सेमीकॉन इंडिया-2026 में दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार और निवेश का विस्तार करने की इच्छा जताई है। वैश्विक कंपनियां भारत की कुशल प्रतिभा और केंद्र तथा राज्य सरकारों की अनुकूल नीतियों का लाभ उठाकर देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही हैं।

लिथोग्राफी उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी एएसएमएल ने भारत में अपना कार्यालय स्थापित किया है। कंपनी ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि उसके और भी ग्राहक भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करेंगे।

एएसएमएल के मुख्य रणनीतिक सोर्सिंग एवं खरीद अधिकारी एलन वेन ने कहा कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में 300 मिलीमीटर की सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने वाली पहली कंपनी है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति माह 50,000 वेफर है।

वेन ने कहा कि भारत में यदि सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बड़े पैमाने पर विकसित करना है तो देश में कई फैब स्थापित करने होंगे।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया में बनने वाली चिप के निर्माण में एएसएमएल के उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वेन ने कहा कि कंपनी किसी क्षेत्र में केवल अपने ग्राहकों को सहयोग देने के लिए ही नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध प्रतिभाओं का लाभ उठाने के लिए भी उतरती है।

भारत ने 2032 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा देश में ही निर्मित वेफर से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आने वाले वर्षों में कई सेमीकंडक्टर फैब स्थापित किए जाने की संभावना है।

सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के अगले चरण के लिए सेमीकॉन 2.0 योजना की घोषणा की है। इसके तहत करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये (13.5 अरब डॉलर) के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत चिप उत्पादन से जुड़े करीब 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव आने की संभावना है।

सेमीकंडक्टर उपकरण बनाने वाली कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स ने कार्यक्रम में अगले 10 साल के दौरान भारत में पांच अरब डॉलर (करीब 48,000 करोड़ रुपये) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इससे एक दिन पहले कंपनी ने कर्नाटक सरकार के साथ चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन के लिए 3,600 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता किया था।

एप्लाइड मैटेरियल्स की प्रतिद्वंद्वी लैम रिसर्च ने भी भारत में सिलिकॉन कलपुर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।

तीन दिवसीय आयोजन के दौरान करीब 56 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुजरात के धोलेरा में चिप निर्माण इकाई और असम में चिप असेंबली एवं परीक्षण इकाई स्थापित करने के लिए किए जा रहे 1.18 लाख करोड़ रुपये के निवेश को समर्थन देने के लिए विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के साथ 16 समझौते किए।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स धोलेरा में 363 एकड़ में एक औद्योगिक पार्क भी विकसित कर रही है, जिसमें उसके संयंत्र के लिए आवश्यक करीब 450 ‘वेंडर’ को जगह देने की योजना है।

कार्यक्रम में भारत की घरेलू चिप-डिजाइन कंपनियों ने भी अपनी योजनाएं सामने रखीं। एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज, इंडिसेमिसी, एक्सिरो और अहीसा डिजिटल इनोवेशंस समेत कई कंपनियों ने वाणिज्यिक स्तर पर चिप उत्पादन और कारोबार को बढ़ाने की योजनाओं की घोषणा की।

सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के अगले चरण में भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप इकाइयों और कंपनियों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है।

सेमीकॉन इंडिया 2026 में 51,000 से अधिक पंजीकरण हुए, करीब 40,000 लोगों की उपस्थिति रही और 600 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। इसमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां की भागीदारी देखने को मिली।

भाषा अजय अजय

अजय


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