भारत एक ‘‘कठिन चुनौती’ : अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर
भारत एक ‘‘कठिन चुनौती’ : अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर
(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, 23 अप्रैल (भाषा) अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने के बाद कहा कि भारत एक ‘‘कठिन चुनौती’’ है।
वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए सहायक यूएसटीआर ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व वाले अमेरिकी दल के साथ व्यापार समझौते के बारीक पहलुओं पर बातचीत की। तीन दिन चली यह वार्ता बुधवार को समाप्त हुई।
जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की ‘वेज एंड मीन्स कमेटी’ से कहा, ‘‘ भारत एक कठिन चुनौती है… उन्होंने लंबे समय से अपने कृषि बाजारों की रक्षा की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ वे इस समझौते का काफी हिस्सा सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।’’
ग्रीर सांसदों द्वारा डीडीजी के निर्यात पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। डीडीजीएस का इस्तेमाल उच्च प्रोटीन वाले पशुधन चारे, सोयाबीन मील और एथनॉल के रूप में किया जाता है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार अपने भारतीय समकक्षों के साथ डीडीजीएस जैसे विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे।
ग्रीर ने कहा, ‘‘ भारतीय व्यापार वार्ताकार इस सप्ताह यहां हैं। इसलिए हम इस सप्ताह इन मुद्दों पर बात कर रहे हैं जिनमें वे विशिष्ट वस्तुएं भी शामिल हैं जिनका आपने उल्लेख किया जैसे डीडीजीएस।’’
भारत और अमेरिका ने दो फरवरी को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की थी और सात फरवरी को समझौते का पाठ जारी किया था।
इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी बाजारों तक तरजीही पहुंच चाहता है क्योंकि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
अमेरिका उस ढांचे के तहत भारत पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था। उसने रूसी तेल की खरीद के कारण भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया था और समझौते के तहत शेष 25 प्रतिशत को 18 प्रतिशत तक घटाना था।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने हालांकि 20 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्कों के खिलाफ फैसला दिया था।
न्यायालय के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू किया।
भारत नए वैश्विक शुल्क ढांचे के तहत अपने हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौते को पुनः समायोजित और पुनर्लेखन करने की कोशिश कर रहा है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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