Jaggi Murder Case News: जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

Jaggi Murder Case News: जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

Jaggi Murder Case News: जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक
Modified Date: April 23, 2026 / 12:18 pm IST
Published Date: April 23, 2026 11:29 am IST
HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाई।
  • हाई कोर्ट ने पहले उन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी
  • मामला 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है

रायपुर: Jaggi Murder Case News छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें समय दे दिया। अमित जोगी की तरफ से बिल की डिमांड की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के पिछले दोनों फैसले पर स्टे दे दिया।

Jaggi Murder Case latest Update बता दें कि इससे पहले 20 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड केस में अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसके बाद अब अगली सुनवाई आज 23 अप्रैल को तय की गई थी। कोर्ट ने इस मामले में दायर SLP और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को एक साथ टैग कर दिया था। अमित जोगी ने कहा था कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

दो अप्रैल को रद्द हुई थी बरी करने का फैसला

आपको बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने दो अप्रैल को अमित जोगी को बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया तथा उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने 2007 में अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है ‘‘हमारी यह सुविचारित राय है कि निचली अदालत द्वारा आरोपी-अमित जोगी को बरी करते हुए दिया गया फैसला स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी, गलत, विकृत, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सबूतों के विपरीत और बिना किसी ठोस आधार के है। ’’

आदेश में कहा गया था कि आरोपी-अमित जोगी को बरी करने के संबंध में माननीय विशेष न्यायाधीश (अत्याचार), रायपुर द्वारा दिया गया फैसला, रद्द किया जाता है। आदेश के अनुसार, आरोपी-अमित जोगी को भी दोषी ठहरा कर वही सज़ा देना चाहिए जो अन्य दोषियों, यानी चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी को दी गई थी।

आदेश में कहा गया है, ”आरोपी-अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी को दोषी ठहराया जाता है और आईपीसी की धारा 120-बी के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 302 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी घोषित ठहराया जाता है। उसे आजीवन कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी जाती है, और जुर्माना न देने पर, उसे छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।”

2003 में हुई थी एनसीपी के नेता जग्गी की हत्या

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता जग्गी की हत्या चार जून, 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया, जिसने अमित जोगी समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए।

31 मई, 2007 को रायपुर की एक निचली अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।

बाद में सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने 2011 में देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी। छत्तीसगढ़ सरकार और रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गईं।

पिछले साल नवंबर में, उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा कि वह अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर फिर से विचार करे। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उच्च न्यायालय ने पिछले माह इस मामले को पुन: खोला।

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