भारत, आसियान के अधिकारी अगले हफ्ते करेंगे वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा
भारत, आसियान के अधिकारी अगले हफ्ते करेंगे वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) भारत और दस सदस्यीय आसियान समूह के व्यापार वार्ताकार अपने वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सोमवार से जकार्ता में बैठक करेंगे। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते की समीक्षा का काम अच्छी तरह आगे बढ़ा है, लेकिन 27 अक्टूबर को कुआलालंपुर में होने वाले 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में किसी भी घोषणा की स्थिति तक पहुंचने में अभी कुछ समय है।
समझौते की 11वें दौर की छह-सात अक्टूबर को होने वाली समीक्षा के बाद शिखर सम्मेलन में नेताओं को मामले में प्रगति से अवगत कराया जाएगा और उनके निर्देश लिए जाएंगे।
अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी भी चर्चाएं चल रही हैं। पिछले तीन-चार महीनों में कुछ प्रगति हुई है। आसियान पक्ष का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि शिखर सम्मेलन होने तक रिपोर्ट करने के लिए महत्वपूर्ण बातें हों।’’
इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘हम समीक्षा पूरी नहीं कर पाएंगे क्योंकि बातचीत अभी उस स्तर पर नहीं है।’’
समीक्षा के लिए दसवें दौर की वार्ता 10-14 अगस्त तक यहां आयोजित की गई थी।
समझौता समीक्षा प्रक्रिया की कमान एक संयुक्त समिति के पास है। इसकी आठ उप-समितियां हैं, जिनमें से प्रत्येक एक विशेष विषय से संबंधित है।
समझौते की समीक्षा भारतीय उद्योग जगत की लंबे समय से चली आ रही मांग है और भारत एक उन्नत समझौते की आशा कर रहा है। यह द्विपक्षीय व्यापार में मौजूदा विषमताओं को दूर करेगा और व्यापार को अधिक संतुलित एवं टिकाऊ बनाएगा।
आसियान के सदस्य देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।
भारत और 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समूह 'आसियान' के बीच वस्तुओं के क्षेत्र में एक मुक्त व्यापार समझौते पर वर्ष 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे।
आसियान व्यापार समझौता जनवरी 2010 में लागू हुआ। दोनों पक्षों ने अगस्त 2023 में कहा था कि वर्ष 2025 तक वस्तुओं पर मौजूदा समझौते की पूर्ण समीक्षा की जाएगी।
एक समूह के रूप में आसियान भारत के प्रमुख व्यापार भागीदारों में से एक है। इसकी देश के वैश्विक व्यापार में लगभग 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 123 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वर्ष के दौरान भारत का कुल निर्यात 96 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 84.15 अरब डॉलर था।
भाषा रमण प्रेम
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