भारत ने दवा उत्पाद के निर्यात बढ़ाने के लिए ब्राजील में अधिक विश्वसनीय नियामकीय व्यवस्था की मांग की

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भारत ने दवा उत्पाद के निर्यात बढ़ाने के लिए ब्राजील में अधिक विश्वसनीय नियामकीय व्यवस्था की मांग की

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  • Publish Date - August 31, 2026 / 11:26 AM IST,
    Updated On - August 31, 2026 / 11:26 AM IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) भारत ने दवा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ब्राजील में अधिक विश्वसनीय नियामकीय व्यवस्था की मांग की है। वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।

यह मुद्दा ब्राजील के ब्रासीलिया में भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी प्रणाली (टीएमएम) की आठवीं बैठक के दौरान उठा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में भारतीय दवा उत्पादों के लिए बाजार पहुंच सुगम बनाने की दिशा में प्रगति हुई।

मंत्रालय के अनुसार, ‘‘भारत ने अधिक विश्वसनीय नियामकीय प्रक्रियाओं और बाजार पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।’’

इसमें कहा गया कि भारत सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा अधिक सुलभ स्वास्थ्य सेवा के प्रयासों को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

भारत और ब्राजील मौजूदा व्यापार समझौते का दायरा बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू करने संबंधी कार्यक्षेत्र की शर्तों को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमत हुए। यह समझौता भारत और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के बीच है।

‘मर्कोसुर’ लातिन अमेरिका का एक व्यापार समूह है जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे शामिल हैं।

भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) एक जून, 2009 को लागू हुआ था।

इस पीटीए का दायरा सीमित है और इसमें केवल 450 शुल्क मदें या उत्पाद शामिल हैं। दोनों पक्ष इस समझौते का दायरा बढ़ाकर इसे पूर्ण व्यापार समझौते में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार और आधुनिकीकरण की काफी गुंजाइश है। वर्ष 2025 में भारत-मर्कोसुर द्विपक्षीय व्यापार 20.84 अरब डॉलर तक पहुंचने के साथ दोनों पक्ष कार्यक्षेत्र की शर्तों को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमत हुए।’’

कार्यक्षेत्र की शर्तों से आशय उस सहमत रूपरेखा से है जो व्यापार समझौते के लिए बातचीत का दायरा, उद्देश्य तथा नियम तय करती है।

भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 15.07 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसे 2030 तक 30 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

भाषा निहारिका

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