भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम सौदा, व्यापक व्यापार समझौते को पूरा करने का संकल्प
भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम सौदा, व्यापक व्यापार समझौते को पूरा करने का संकल्प
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) भारत और कनाडा ने सोमवार को कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए सहयोग की एक महत्वाकांक्षी रणनीति को अंतिम रूप दिया। इस रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में इस वर्ष के अंत तक ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (सीईपीए) को संपन्न करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को वर्तमान के 13 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर के पार ले जाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया गया है। इसके अलावा दोनों देशों ने 2.6 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण यूरेनियम समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
दोनों नेताओं के बीच हुई यह व्यापक वार्ता इस मायने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह संबंधों में आए एक लंबे गतिरोध के बाद हो रही है।
वर्ष 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट की संभावित संलिप्तता के निराधार आरोपों के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। उस समय उपजी तल्खी ने व्यापारिक और कूटनीतिक संवाद को लगभग बाधित कर दिया था।
हालांकि, पिछले वर्ष मार्च में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से दोनों पक्षों ने संबंधों के पुनर्निर्माण और विश्वास बहाली के लिए उपायों की एक निरंतर श्रृंखला शुरू की।
आज की बैठक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दोनों देशों के संबंध अब उस अस्थिरता के दौर से बाहर निकलकर अधिक परिपक्व, स्थिर और भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुके हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दोनों देशों ने एक नयी रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा की। इसके प्रथम चरण के अंतर्गत, भारत सरकार और सस्काटून (कनाडा) स्थित प्रमुख कंपनी ‘कैमेको’ के बीच 2.6 अरब डॉलर के एक वृहद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार, कैमेको वर्ष 2027 से 2035 के बीच भारत को लगभग 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति करेगी, जो भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ईंधन की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमने दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हम छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर) तथा उन्नत रिएक्टर की प्रौद्योगिकी पर भी साथ मिलकर काम करेंगे।’
आर्थिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के विश्वास की सराहना की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, ‘‘कनाडा के पेंशन कोष ने अब तक भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह भारत की आर्थिक प्रगति में उनके गहरे और अटूट विश्वास का प्रतीक है।’’
हमारा साझा लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। आर्थिक सहयोग की इस विराट क्षमता का दोहन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए ‘सीईपीए’ को शीघ्र ही अंतिम रूप दिया जाएगा।’
प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन समझौतों से दोनों ही देशों में निवेश के नए प्रवाह के साथ-साथ रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर के आसपास है, जिसे चौगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग के नए आयाम खोले हैं। दोनों नेताओं ने ‘भारत-कनाडा रक्षा संवाद’ स्थापित करने का निर्णय लिया है, जो रक्षा उद्योगों के एकीकरण, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘भारत और कनाडा दोनों इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ न केवल हमारे देशों के लिए बल्कि समस्त मानवता के लिए गंभीर चुनौती हैं। वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए इन शक्तियों के विरुद्ध हमारा निकट सहयोग अनिवार्य है।’’
कनाडाई पक्ष द्वारा जारी विवरण के अनुसार, दोनों नेता सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। इसमें मादक पदार्थों के अवैध प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क पर नकेल कसने जैसे साझा चिंता के विषय शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्नी ने यह भी रेखांकित किया कि कनाडा ‘सीमापार दमन’ (ट्रांसनेशनल रिप्रेशन) के विरुद्ध कड़े उपाय करना जारी रखेगा।
महत्वपूर्ण खनिजों पर हुआ समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग के लिए कायाकल्प करने वाला साबित हो सकता है। कनाडा दुर्लभ खनिजों का एक विशाल भंडार है और यह समझौता भारत के लिए एक मजबूत और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करेगा।
ऊर्जा क्षेत्र की इस अगली पीढ़ी की साझेदारी में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कई कनाडाई विश्वविद्यालयों द्वारा भारत में अपने परिसर (कैंपस) खोलने की योजना बनाई गई है। कृत्रिम मेधा (एआई), स्वास्थ्य सेवा, कृषि और नवाचार के क्षेत्रों में दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच नयी साझेदारियों की घोषणा की गई है। इसके साथ ही, ‘प्रतिभा एवं नवाचार रणनीति’ के माध्यम से लोगों के बीच आपसी संपर्क को और अधिक प्रगाढ़ बनाया जाएगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग की नयी घोषणाएं की गईं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (सीएसए) पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। दोनों एजेंसियां अंतरिक्ष अन्वेषण और क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त पहल की संभावनाओं को तलाशेंगी, जिससे आपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी नवाचार में सहायता मिलेगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की नाजुक स्थिति पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी संघर्ष का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से करने का पक्षधर है। उन्होंने क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
संयुक्त वक्तव्य में मोदी और कार्नी ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी साझा और अडिग निष्ठा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा का निकट सहयोग अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने, आर्थिक जुझारू क्षमता को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा। दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने के संकल्प को दोहराया।
अंत में, प्रधानमंत्री कार्नी ने यूरेनियम आपूर्ति समझौते को ‘स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब’ बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी समझौते एक समृद्ध भविष्य की नींव हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रमिकों और व्यवसायों को ऐतिहासिक अवसर प्रदान करेंगे।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्वी) पी. कुमारन ने मीडिया को जानकारी देते हुए सारांश प्रस्तुत किया और कहा कि संबंधों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया अब धरातल पर ‘ठोस आर्थिक परिणामों’ में बदल रही है।’
भाषा सुमित अजय
अजय

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