भारत, यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते में मध्यस्थता से जुड़ा परिशिष्ट शामिल
भारत, यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते में मध्यस्थता से जुड़ा परिशिष्ट शामिल
नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में विवादों के त्वरित और आपसी सहमति से समाधान के लिए मध्यस्थता से जुड़ा एक परिशिष्ट शामिल किया गया है।
समझौते के पाठ के अनुसार, ‘मॉडल मध्यस्थता प्रक्रिया’ पर एक अलग परिशिष्ट जोड़ा गया है। इस समझौते के निष्कर्ष की घोषणा 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने की थी।
समझौते पर विधिक परीक्षण के बाद हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस व्यापार समझौते को अगले वर्ष लागू किया जा सकता है।
पाठ के मुताबिक, भारत या ईयू में से कोई भी पक्ष किसी ऐसे उपाय के खिलाफ, जिससे द्विपक्षीय व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ने का आरोप हो, किसी भी समय मध्यस्थता की मांग कर सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया दोनों पक्षों की आपसी सहमति से ही शुरू होगी।
यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मध्यस्थ की नियुक्ति पर सहमति नहीं बनती है, तो मध्यस्थता का अनुरोध स्वतः निरस्त माना जाएगा।
मध्यस्थता प्रक्रिया उस पक्ष के क्षेत्र में होगी जिसके पास अनुरोध भेजा गया है, या आपसी सहमति से किसी अन्य स्थान या माध्यम से भी हो सकती है।
मध्यस्थ की नियुक्ति के 60 दिन के भीतर समाधान तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
समझौते में ‘विवाद निपटान’ पर एक अलग अध्याय भी है, जिसका उद्देश्य समझौते की व्याख्या और अनुप्रयोग से जुड़े विवादों के शीघ्र और प्रभावी समाधान की व्यवस्था करना है।
करीब दो दशक चली वार्ताओं के बाद संपन्न एफटीए के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों के समूह में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि ईयू से लक्जरी कार और वाइन का आयात सस्ता होगा।
दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं।
समझौते के पाठ के मुताबिक इसमें कुल 20 अध्याय हैं। इनमें डिजिटल व्यापार पर भी एक अलग अध्याय शामिल है, जो कागज-रहित व्यापार और नियामकीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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