भारत में ऊर्जा निर्यातक बनने की क्षमता : गडकरी
भारत में ऊर्जा निर्यातक बनने की क्षमता : गडकरी
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण बदलते वैश्विक परिदृश्य और एथनॉल, हाइड्रोजन तथा पर्यावरण अनुकूल विमान ईंधन (एसएएफ) के मोर्चे पर देश की प्रगति के चलते भारत में अब ऊर्जा आयातक से ऊर्जा निर्यातक बनने की क्षमता है।
मारुति सुजुकी की भारत में पहली ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ कार को पेश किए जाने के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल आदि) पर निर्भरता आर्थिक बोझ के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी है।
गडकरी ने कहा, “अब हमारे पास ऊर्जा आयातक देश से ऊर्जा निर्यातक देश बनने की क्षमता है।”
उन्होंने बताया कि भारत फिलहाल हर साल 78,000 टन पर्यावरण अनुकूल विमानन ईंधन (एसएएफ) का उत्पादन कर रहा है और अगले दो वर्षों में देश इसके निर्यातक बन सकता है। भविष्य में लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों में भी एसएएफ के उपयोग की योजना है।
मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण देश की बड़ी समस्या है और इसमें परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। इसलिए एथनॉल और सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि देश में एथनॉल का उत्पादन अधिशेष में है और मक्का से एथनॉल बनाने के फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की आय में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई है।
गडकरी ने कहा कि मक्का की कीमत पहले 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने हरित हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों के लिए देशभर में 10 राजमार्ग खंडों की पहचान की है ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंगनगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और जामनगर-अहमदाबाद जैसे मार्ग शामिल हैं।
उन्होंने वाहन क्षेत्र की भूमिका पर कहा कि यह क्षेत्र केंद्र और राज्यों को सबसे अधिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) देता है और करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है।
गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने परिवहन मंत्रालय संभाला था तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये का है, चीन का 47 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि भारत का लगभग 22 से 23 लाख करोड़ रुपये का है।
भाषा योगेश रमण
रमण

Facebook


