भारत-इजराइल द्विपक्षीय निवेश समझौता प्रभाव में आया

भारत-इजराइल द्विपक्षीय निवेश समझौता प्रभाव में आया

भारत-इजराइल द्विपक्षीय निवेश समझौता प्रभाव में आया
Modified Date: July 4, 2026 / 08:08 pm IST
Published Date: July 4, 2026 8:08 pm IST

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) शनिवार से प्रभावी हो गया। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने बताया कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच निवेश के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल सुनिश्चित होगा और द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) एक तरफ जहां निवेश और निवेशकों को पूरी सुरक्षा देता है, वहीं दूसरी तरफ देश के हितों से जुड़े फैसलों के लिए सरकार को जरूरी नीतिगत छूट भी प्रदान करता है। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के आधुनिक नियमों और बदलते कानूनी दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुकूल है।

बयान में कहा गया कहा कि भारत और इजराइल ने आठ सितंबर, 2025 को नयी दिल्ली में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो चार जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गया है।

समझौते के तहत भारत ने इजराइली निवेशकों के लिए स्थानीय कानूनी उपायों (लोकल रेमेडीज) अपनाने की अनिवार्य अवधि को घटाकर तीन वर्ष कर दिया है।

‘लोकल रेमेडीज’ का अर्थ है कि किसी विवाद की स्थिति में निवेशकों को पहले मेजबान देश की कानूनी प्रणाली के माध्यम से समाधान का प्रयास करना होता है। उसके बाद ही वे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा ले सकते हैं। सामान्यतः भारत इस अवधि को पांच वर्ष रखता है।

भारत-इजराइल बीआईए में पहली बार पोर्टफोलियो निवेश को भी शामिल किया गया है, जो पहले ऐसे समझौतों से अलग प्रावधान है। इजराइल ओईसीडी (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन) का पहला सदस्य देश है जिसके साथ भारत ने ऐसा समझौता किया है।

आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 2015 के मॉडल टेक्ट्स संधि में पोर्टफोलियो निवेश को शामिल नहीं किया गया था, जबकि इजराइल के साथ हुए समझौते में शेयर अन्य इक्विटी होल्डिंग्स के साथ-साथ योग्य बॉन्ड, ऋण और अन्य कॉरपोरेट कर्ज शामिल हैं।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘इससे भारत की निवेशक-राज्य विवादों के प्रति जोखिम क्षमता बढ़ सकती है, जो अब तक मुख्य रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) तक सीमित थी।’’

उन्होंने कहा कि इजराइल समझौता निवेशकों को घरेलू कानूनी उपाय अपनाने के बाद तीन वर्ष में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की अनुमति देता है, जबकि भारत के 2015 मॉडल बीआईटी और बाद के कई समझौतों में यह अवधि पांच वर्ष है।

श्रीवास्तव ने कहा कि यूएई और इजरायल के साथ हुए ये समझौते दर्शाते हैं कि भारत निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तक तेज पहुंच दे रहा है।

भाषा योगेश रमण

रमण


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